
फोटो पत्रिका नेटवर्क
अजमेर। दरगाह क्षेत्र में गुरुवार रात छोटी ओसवाल स्कूल के पास सड़क किनारे मिली एक महीने की मासूम बालिका ने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया। पीठ पर बड़ी गांठ और बड़े सिर जैसी शारीरिक विकृतियों से जूझ रही बच्ची को किसी ने अंधेरे में यों छोड़ा, मानो जन्म लेकर वह किसी का बोझ बन गई। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उसको किसने छोड़ा, बल्कि यह भी कि आखिर उसका कसूर क्या था? जिसने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं, उसे दुनिया की बेरुखी का सामना करना पड़ा।
गुरुवार रात दरगाह के लाखन कोटड़ी क्षेत्र में छोटी ओसवाल स्कूल के पास लोगों को सड़क किनारे एक बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। राहगीर ने आसपास देखा तो पीली टी-शर्ट पहने करीब एक माह की मासूम कपड़े में लिपटी पड़ी थी। सूचना पर दरगाह थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सहायक उप निरीक्षक श्यामलाल ने बताया कि बच्ची के पीठ पर गांठ है और सिर सामान्य से बड़ा है। आशंका है कि शारीरिक विकृतियों के कारण ही उसे छोड़ दिया गया।
जिस सड़क पर मासूम बच्ची मिली, वहां अक्सर आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। गनीमत रही कि मासूम किसी हादसे का शिकार नहीं बनी। बच्ची को देख कई लोगों की आंखें नम हो गईं। मौके पर मौजूद लोगों के बीच एक ही सवाल था-क्या एक मां का दिल इतना पत्थर हो सकता है?
यह घटना सिर्फ पुलिस केस नहीं, समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है? अगर मासूम बालिका बोल पाती तो शायद पूछती-‘क्या मेरी बीमारी ही मेरा अपराध है?’ ‘क्या मां की गोद सिर्फ स्वस्थ बच्चों के लिए होती है?’ ‘क्या मुझे जीने का हक नहीं ?’
पुलिस संवेदनशीलता दिखाते हुए बालिका को तुरन्त जेएलएन अस्पताल के शिशुरोग विभाग लेकर पहुंची। उसका मेडिकल परीक्षण कराया। चिकित्सकों के बालिका की तबीयत स्थिर बताते हुए छुट्टी दे दी। पुलिस ने बालिका को बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) सदस्य अरविन्द कुमार मीणा के समक्ष पेश किया। जहां से उसको बालिका गृह भेज दिया।
सीडब्ल्यूसी सदस्य अरविन्द कुमार मीणा ने बताया कि बालिका के जन्म से शारीरिक विकृति है लेकिन स्वस्थ है। लोहागल स्थित शिशु गृह में आश्रय दिलाया गया है। सरकारी अस्पतालों में ‘मुफ्त’ इलाज की सुविधा है। बालिका का उपचार कराया जा सकता है।
Updated on:
15 May 2026 02:03 pm
Published on:
15 May 2026 02:03 pm
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