
students admission
अजमेर.
कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने पूर्व विद्यार्थी (एक्स स्टूडेंट) को भी अस्थाई प्रवेश का अवसर दिया है। निदेशक संदेश नायक ने बताया कि बुधवार से कॉलेज के प्रवेश लॉगिन में यह व्यवस्था प्रारंभ होगी।
पूर्व विद्यार्थियों को भी अगली कक्षाओं में अस्थाई दाखिले मिलेंगे। 21 से 31 अगस्त तक स्नातक पार्ट द्वितीय, तृतीय और स्नातकोत्तर उत्तर्राद्र्ध के पात्र मानते हुए प्रवेश दिए जाएंगे। साथ ही ई-मित्र पर फीस जमा की जाएगी।
क्लासरूम टीचिंग बेस्ट, ऑनलाइन तकनीक नहीं मददगार
अजमेर. शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि कक्षा शिक्षण ज्यादा प्रभावशाली है। मशीनी तकनीक ज्यादा कारगार नहीं है। यह विचार महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जारी राष्ट्रीय वेबिनार में सामने आए।
सशक्त राष्ट्र निर्माण में नवीन शिक्षा नीति की भूमिका विषय आधारित सेमिनार में बोलते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को अन्तर विषयान्तर्गत अध्ययन के साथ-साथ अशैक्षणिक कर्मचारियों से संवाद रखना चाहिए। कक्षा में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद सशक्त होता है। शिक्षण मशीनरी तकनीक से यह संभव नहीं है।
पूर्व सांसद औंकार सिंह लखावत ने कहा कि नई शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में देने का प्रावधान किया गया है। जो मातृभाषा को नहीं समझेगा वह पन्ना धाय, मीरा और महाराणा प्रताप के शौर्य को नहीं समझ सकेगा।मुख्य वक्ता डॉ नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि प्रारंभ में शिक्षा छात्र के मानसिक विकास तक ही सीमित थी। वास्तव में शिक्षा व्यक्ति के समग्र विकास के लिए होनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडानी ने कहा शिक्षा नीति की बुनियाद में ही सशक्त, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना निहित थी। आजादी के बाद नीति निर्धारकों ने इसे गौण कर दिया। एम्स और आईआईटी अंग्रेजी माध्यम में संचालित हैं। फिर भी ये संस्थान विश्व के 200 पायदान पर भी नहीं है। सिर्फ अंग्रेजी से देश आगे नहीं बढ़ता है।
Published on:
19 Aug 2020 07:18 am
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