Problem: ना वाइस चांसलर ना डीन कमेटी, कैसे चलेगी यूनिवर्सिटी

Problem: ना वाइस चांसलर ना डीन कमेटी, कैसे चलेगी यूनिवर्सिटी

raktim tiwari | Updated: 01 Aug 2019, 08:14:00 AM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

Problem: कमेटी में विज्ञान संकाय के डीन प्रो.प्रवीण माथुर, सामाजिक विज्ञान के डीन प्रो. शिवदयाल सिंह सहित कुलसचिव और वित्त नियंत्रक भागीरथ सोनी शामिल हैं।

अजमेर

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) की परेशानियां बुधवार से बढ़ जाएंगी। यहां शैक्षिक और प्रशासनिक कामकाज देख रही डीन कमेटी कामकाज नहीं कर सकेगी। कमेटी से एक डीन और बॉम सदस्य का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो गया कुलपति (vice chancellor) के कामकाज पर पहले ही रोक कायम है। ऐसे में अहम पत्रावलियों पर फैसला नहीं हो सकेगा।

राजस्थान हाईकोर्ट ने लक्ष्मीनारायण बैरवा की याचिका पर कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह (r.p.singh) के कामकाज पर बीते साल 11 अक्टूबर से रोक लगाई है। यह रोक 2 अगस्त तक कायम है। यहां चुनिंदा शैक्षिक, प्रशासनिक और परीक्षात्मक कार्यों के लिए राजभवन ने जनवरी में डीन कमेटी (dean committee) बनाई थी। कमेटी में विज्ञान संकाय के डीन प्रो.प्रवीण माथुर, सामाजिक विज्ञान के डीन प्रो. शिवदयाल सिंह सहित कुलसचिव और वित्त नियंत्रक (finance controller) भागीरथ सोनी शामिल हैं।

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अब बढ़ेगी परेशानी

डीन कमेटी सदस्य और पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. माथुर का बतौर डीन कार्यकाल और अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. शिवदयाल सिंह का प्रबंध मंडल का दो वर्षीय कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो गया। यहां स्थाई कुलसचिव पद पहले ही रिक्त है। ऐसे में वित्त नियंत्रक ही कमेटी में एकमात्र सदस्य (member) रह गए हैं।

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सिर्फ दो डीन कार्यरत..
मौजूदा वक्त विश्वविद्याल के मैनेजमेंट (management), कॉमर्स (commerce), शिक्षा (education), कला (arts), ललित कला संकाय (fine arts), विज्ञान (science) के डीन पद रिक्त हैं। विधि संकाय के डीन डॉ. डी. के. सिंह का बीते अप्रेल में निधन हो चुका है। अब सामाजिक विज्ञान संकाय और डीन छात्र कल्याण ही कार्यरत हैं। नियमानुसार कुलपति ही डीन (faculty dean)की नियुक्ति के लिए अधिकृत हैं।

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यूं तैयार होती है डिग्री
नियमानुसार विश्वविद्यालय सभी स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थियों (नियमित/स्वयंपाठी) की डिग्री तैयार करता है। डिग्रियों पर संबंधित कुलपति (उस वक्त नियुक्त) के हस्ताक्षर होते हैं। खासतौर पर दीक्षान्त समारोह से पूर्व कुलपति की अध्यक्षता में प्रबंध मंडल (board of management) की बैठक होती है। इसमें डिग्रियों को ग्रेस पास किया जाता है। इसके बाद इनका वितरण होता है।

इस बार कौन करेगा हस्ताक्षर?

सत्र 2018-19 की डिग्री (degree) पर हस्ताक्षर को लेकर पेचीदा स्थिति बन सकती है। सत्रारंभ के दौरान प्रो. श्रीमाली विश्वविद्यालय के कुलपति थे। 30 अप्रेल को सत्रांत हुआ तो कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह हैं। नियमानुसार वे ही मौजूदा डिग्रियों पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत हैं। लेकिन कामकाज पर होईकोर्ट की रोक हटने के बाद ही यह संभव है।

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