अजमेर. पुष्कर आदिकाल से श्रेष्ठतम तीर्थस्थल माना जाता है। इसकी रचना स्वयं प्रजापिता ब्रह्माजी ने की थी। पुष्कर तीर्थ पर आना सौभाग्यशाली माना जाता है। पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाने के बाद ही तीर्थयात्रा पूरी होती है। कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा पर प्रतिवर्ष पुष्कर मेला भरता है। पौराणिकाल के सरोवर को सावित्री पहाड़ी से देखने पर वह अद्भुत दिखता है। ठेठ राजस्थान की अलबेली संस्कृति भी दिखाई देती है।

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