
Mp raghu sharma critsize govt
अजमेर.
सांसद रघु शर्मा ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने अजमेर की तीन महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में फच्चर फंसाने का कार्य किया है। वसुंधरा सरकार की वादाखिलाफी की वजह से यह योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गई है और उनकी लागत भी लगभग दो गुनी हो चुकी है।
पत्रिका से विशेष बातचीत में शर्मा ने अजमेर-सवाईमाधोपुर, अजमेर-कोटा और पुष्कर-मेड़ता के बीच प्रस्तावित रेल परियोजनाओ का जिक्र करते हुए कहा कि 2012 में प्रदेश की गहलोत सरकार व केन्द्र की यूपीए सरकार में यह सहमति बनी थी कि रेल परियोजनाओं के लिए केन्द्र व प्रदेश आधा आधा पैसा देगी एवं राज्य सरकार रेलवे लाइन के लिए जमीन भी उपलब्ध कराएगी।
उन्होने आरोप लगाया कि उसके बाद भाजपा ने सत्ता में आते ही इन परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता और जमीन उपलब्ध कराने से मुकर गई। सांसद बनने के बाद उन्होने लोकसभा में भी अजमेर से जुड़ी रेल परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आवाज उठाई। लोकसभा में ही उनके सवाल के जवाब में यह सूचित किया गया कि राज्य सरकार ने परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया है।
उन्होने कहा पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अजमेर से सवाई माधोपुर के बीच प्रस्तावित लाइन की जद में आने वाले क्षेत्रों के लोगों ने भाजपा सरकार को वोट देकर विजयी बनाया। यहां से अधिकांश विधायक और सांसद भाजपा के है इसके बावजूद अजमेर-सवाई माधोपुर रेल परियोजना पर कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होने बताया कि पूर्व में लगभग 800 करोड़ की इस योजना की लागत अब लगभग दोगुनी हो चुकी है। शर्मा ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इन तीनों परियोजनाओं को मूर्त रुप दिया जाएगा।
नहीं बैठते इंडस्ट्री में फिट
औद्योगिक मांग के अनुसार संस्थान विद्यार्थी तैयार नहीं कर रहे हैं। महज तीस फीसदी विद्यार्थियों को मुश्किल से रोजगार मिल रहा है। सत्तर फीसदी नौजवानों का शैक्षिक, तकनीकी और अन्य पैमाने पर खरे नहीं उतरना चिंताजनक है। इसे बदलने की जरूरत है। यह बात केंद्रीय परियोजना परामर्शदाता (टेक्यूप-तृतीय) प्रो. प्रकाश मोहनराव खोडक़े ने महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित उपाधि वितरण समारोह में कही। इस दौरान बॉयज और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं को उपाधियां बांटी गई।
प्रो. खोडक़े ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में युवाओं को खुद को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। पिछले दस-बीस साल में देश में भरपूर स्कूल, कॉलेज, उच्च, तकनीकी शिक्षण संस्थान खुले, लेकिन महज 23 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को ही इनमें पढऩे का अवसर मिल रहा है। 77 प्रतिशत विद्यार्थी ड्रॉप आउट या अन्य कारणों से शिक्षा ग्रहण नहीं कर रहे। संस्थानों में औद्योगिक मांग के अनुसार विद्यार्थी तैयार नहीं हो रहे। इस नाकामी के पीछे स्वयं विद्यार्थी भी उत्तरदायी हैं। केवल गुरुओं, शिक्षण व्यवस्था पर दोषारोपण की बजाय उन्हें खुद से प्रतिस्पर्धा, कमजोरियों को दूर करने और आत्म अवलोकन के गुण विकसित करने होंगे।
Published on:
30 Sept 2018 09:51 am
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