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राहुल गांधी गुपचुप करा रहे ये सर्वे, मालूम होगी कितने पानी में है कांग्रेस

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congress survey

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अजमेर

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी के संकेत पर अजमेर में सर्वे चल रहा है। सर्वे के लिए एक ब्राह्मण राजनेता अजमेर जिले के आठों विधानसभा क्षेत्र में सर्वे कर रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपेंगे। सर्वे के दौरान वे कांग्रेस के पदाधिकारियों से नहीं मिलकर विभिन्न वर्ग, आमजन के मध्य जिताऊ उम्मीदवार के साथ संभावनाएं तलाश रहे हैं।


कांग्रेस के राष्ट्रीय आलाकमान के निर्देशन में आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व विधानसभावार सर्वे के तहत ब्राह्मण राजनेता ने अजमेर में सर्वे कर लिया है। उन्होंने सबसे पहले राजपूत प्रतिनिधियों से मुलाकात की। वे सोमवार को केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में सर्वे करेंगे। जिले के अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र, अजमेर दक्षिण, पुष्कर, नसीराबाद, मसूदा, केकड़ी, किशनगढ़ एवं ब्यावर विधानसभा क्षेत्र में वे विभिन्न वर्गों के साथ व्यापारियों, आमजन किसान सहित अन्य लोगों से मिलकर जानकारी जुटा रहे हैं।

वर्तमान में जिले में कांग्रेस संगठन के साथ वर्तमान विधायक, हारे हुए प्रत्याशियों के साथ अन्य नए चेहरों, युवाओं आदि के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। कांगे्रस पार्टी में इस सर्वे को अहम माना जा रहा है। भारद्वाज की रिपोर्ट पर संभवत: आखिरी मुहर लग सकती है। हालांकि इससे पूर्व भी अजमेर जिले में दो बार सर्वे हो चुका है। एक बार कांग्रेस प्रदेश इकाई की ओर से सर्वे किया गया जबकि दूसरी मर्तबा राष्ट्रीय इकाई के माध्यम से एक प्राइवेट कंपनी (रूद्राक्ष) की ओर से सर्वे किया जा चुका है।

सर्वे का अगला पड़ाव नसीराबाद एवं मसूदा हो सकता है। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य शाकिर ने की जियारत : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य शाकिर सनदी ने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत की। उन्होंने मजार पर मखमली चादर चढ़ाई व अकीदत के फूल पेश किए। सनदी कर्नाटक के हुबली से हैं। वह निजी यात्रा पर अजमेर आए थे।

स्थाई कुलपति की नियुक्ति नहीं आसान

विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की तत्काल नियुक्ति आसान नहीं है। अव्वल तो नियमानुसार सर्च कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें यूजीसी, राजभवन, बॉम और सरकार के प्रतिनिधि की नियुक्ति होगी। इसके बाद कुलपति पद के आवेदन लिए जाएंगे। सर्च कमेटी आवेदनों की छंटाई कर तीन या पांच नाम का पैनल सरकार और राजभवन को सौंपेगी। इनमें से किसी एक शिक्षाविद् को राज्यपाल सरकार की सलाह पर कुलपति नियुक्त करेंगे। इस साल विधानसभा चुनाव होने के कारण यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।