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जेल सुरक्षा के ‘सुराख’ भरे, आईडी कार्ड से होगा जेल परिसर में प्रवेश

राजस्थान पत्रिका के स्टिंग के बाद चेता जेल प्रशासन,आरएसी के जवानों को मुस्तैदी से ड्यूटी की दी नसीहत, बिना पहचान-पत्र कोई भी जेल में नहीं हो सकेगा दाखिल  

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अजमेर

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Manish Singh

Mar 07, 2024

जेल सुरक्षा के 'सुराख' भरे, आईडी कार्ड से होगा जेल परिसर में प्रवेश

जेल सुरक्षा के 'सुराख' भरे, आईडी कार्ड से होगा जेल परिसर में प्रवेश

अजमेर(Ajmer News). सेन्ट्रल जेल अजमेर की जर्जर बाहरी दीवार पर पैबंद लगाने की कवायद शुरू हो गई है। टूटी दीवार के निर्माण से अब जेल परिसर में असामाजिक तत्वों की संभावित आवाजाही पर अंकुश लग सकेगा। इधर जेल अधीक्षक ने जेल परिसर की बाहरी सुरक्षा में तैनात आरएसी के जवानों को भी मुस्तैदी से ड्यूटी अंजाम देने, निगरानी रखने के साथ बिना पहचान पत्र के जेल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।

'पत्रिका' के स्टिंग से हरकत में आया प्रशासन

'पत्रिका' में 5 मार्च के अंक में ‘सेन्ट्रल जेल की सुरक्षा में ‘सुराख’ शीर्षक से स्टिंग न्यूज प्रकाशित होने के बाद सेन्ट्रल जेल प्रशासन बुधवार को एक्शन मोड में नजर आया। जेल अधीक्षक आर. अनन्तेश्वरन ने जेल की बाहरी सुरक्षा दीवार का जायजा लेने के बाद क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत के आदेश दिए। बुधवार सुबह जेल के सामने की बाहरी दीवार में बने बड़े-बड़े सुराखों की मरम्मत का काम शुरू हो गया। गौरतलब है कि बाहरी दीवार में करीब तीन से चार जगह बड़े-बड़े सुराख बने हुए थे। जिससे बाहरी असामाजिक तत्वों ने जेल के भीतर आवाजाही का रास्ता बना लिया था। दीवार की मरम्मत से बाहरी लोगों के भीतर प्रवेश पर अंकुश लग सकेगा।

बना है त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र

-सेन्ट्रल जेल अजमेर में बाहरी दीवार समेत त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र है। बाहरी दीवार के बाद करीब 15 फीट ऊंची दूसरी दीवार है। जिस पर लगे कंटीले तारों में करंट रहता है। बाहरी तीसरे चक्र की दीवार पर चारों ओर हाई वॉचिंग टावर बने हुए हैं। जहां चौबीस घंटे आरएसी (राजस्थान आर्म्ड कॉर्प्स) बटालियन के हथियारबंद जवान तैनात रहते हैं।

-जेल की दूसरी दीवार के बाद 15 फीट का बड़ा गलियारा है। गलियारे में भी पर्याप्त दूरी पर वॉच टावर बने हुए हैं। जहां आरएसी के जवान निगरानी में रहते हैं। गलियारे के बाद तीसरी दीवार पर भी कंटीले तारों का जाल है। तीसरी दीवार के बाद जेल सुरक्षा के जेल प्रहरी तैनात रहते हैं। तीसरी दीवार के बाद बंदियों के वार्ड, बैरक व सेल बने हैं। जहां पर सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को रखा जाता है।

सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार

अजमेर सेन्ट्रल जेल अंग्रेजी शासन के समय से है जिसकी गिनती देश की सबसे सुरक्षित जेलों में की जाती है। जेल में स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों को भी रखा जाता था। इसके अलावा जेल ने श्रीगंगानगर का घड़साना जल आंदोलन, गुर्जर आरक्षण आन्दोलन भी देखा है। हालांकि कुख्यात अपराधी मौखम सिंह एक बार जेल की दीवार फांदकर भाग चुका है।

बिना पहचान नहीं होगा प्रवेश

जेल की दीवार की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। जहां भी दीवार क्षतिग्रस्त है उसको मरम्मत करवाया जाएगा। जेल की बाहरी सुरक्षा में तैनात जवानों को अंजान व्यक्ति के प्रवेश पर निगरानी के निदेश दिए है। गुरूवार से बिना पहचान पत्र के जेल प्रवेशद्वार से भी आवाजाही पर पाबंदी रहेगी।

आर. अनंतेश्वरन, अधीक्षक सेन्ट्रल जेल अजमेर