अजमेर. सोलथम्बा फरिकेन की ओर से शुक्रवार को ईसर-गणगौर (राठौड़ बाबा) की पारम्परिक सवारी निकाली गई। सवारी का कई जगह पुष्प वर्षा व इत्र छिड़कर स्वागत किया गया। सवारी देखने देर रात लोग नया बाजार सहित आसपास के इलाकों में डटे रहे।
शुक्रवार शाम 7.30 बजे मोदियाना गली से राठौड़ बाबा, सर्राफा पोल से जटाधारी बाबा, खटोला पोल और व्यास गली से गणगौर की पारम्परिक सवारी गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। सवारियां होलीदड़ा कड़क्का चौक, नया बाजार चौपड़ आगरा गेट होते हुए नसियां के निकट भोजनशाला तक पहुंची। यहां कुछ देर विश्राम के बाद रात्रि दो बजे आगरा गेट, चौपड़, घी मंडी, सर्राफा पोल, मोदियाना गली होते हुए सवारी वापस पहुंची।
कई जगह स्वागत-सजावट
कई स्थानों पर राठौड़ बाबा और गणगौर की सवारी का स्वागत हुआ। नया बाजार, लक्ष्मी चौक और आसपास के क्षेत्र में सजावट की गई। इस दौरान आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने अगवानी की। अशोक बिंदल, डॉ. एम. एल. अग्रवाल, पार्षद के के त्रिपाठी व अशोक मुद्गल, संजय अत्तार, श्यामलाल तिवाड़ी, राजेश मिश्रा, सर्राफा पोल मुकेश दत्त, खटोला पोल बद्रीलाल, अनिल शर्मा, ओम मिश्रा, नरेश रतावा, मनीष व्यास, दिलीप बीजावत, बाला मुंशी, होलीदड़ा हीराचंद विजयवर्गीय, अशोक त्रिवेदी, रजनीकांत मौजूद रहे।
पारंपरिक गहनों से सजाया
इस मौके पर ईसर-गणगौर को पारंपरिक स्वर्णाभूषण पहनाए गए। इनमें बाजूबंद, लडिय़ों का हार, बोरला, पायजेब, सोने की चूडिय़ां, रखड़ी, नथ और अन्य गहने शामिल थे। लोगों में ईसर-गणगौर के गहने देखने और मनौती मांगने की होड़ रही।
ओ पवन वेग से उडऩे वाले घोड़े. .
गणगौर की सवारी के दौरान बैंड वादकों के बीच प्रतियोगिता हुई। इनमें ओ पवन वेग से उडऩे वाले…, अरे जा रे हट नटखट…, पंख होती तो उड़ आती…., म्हारी घूमर छै नखराली…., भंवर म्हने पूजण द्यो गणगौर..की पेश की गई धुनों पर लोगों के पैर थिरक उठे।
मेहंदी लच्छा वितरण आज
मोदियाना गली में सवारी के वापस लौटने पर रतजगा हुआ। यहां शनिवार सुबह मेहंदी लच्छे और प्रसाद का वितरण किया जाएगा। लोग मेहंदी को शुभ मानते हुए घर ले जाते हैं।