
अजमेर। स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा....का नारा बुलंद करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अलग पहचान है। उनका नाम सदैव आदर और सम्मान से लिया जाता रहा है। लेकिन राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई से जुड़ी एक संदर्भ पुस्तक में उन्हें 'आतंक का जनक' बताया गया है। यह पुस्तिका आठवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान से जुड़ी है।
तिलक ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अहम योगदान दिया है। उन्होंने अंग्रेजों की दासता से मुक्ति के लिए सर्वप्रथम 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा बुलंद किया था। इसके अलावा तिलक ने देश में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए गणेश उत्सव की शुरुआत भी कराई थी। हाल में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई की आठवीं कक्षा के लिए सामाजिक विज्ञान की संदर्भ पुस्तक छपवाई गई है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूली विद्यार्थियों के लिए खासतौर पर संदर्भ पुस्तक भेजी गई। इसमें एक विवादास्पद तथ्य से सवाल खड़े हो गए हैं।
तिलक थे आतंक के जनक!
सामाजिक विज्ञान की संदर्भ पुस्तक के पाठ 22 के तहत पेज 237 पर आपत्तिजनक तथ्य लिखा गया है। '18-19वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आंदोलन की घटनाएं' शीर्षक से जुड़े पाठ में कहा गया है कि तिलक ने राष्ट्रीय आंदोलन में उग्र प्रदर्शन का मार्ग अपनाया। इसके चलते उन्हें 'आतंक का जनक' कहा जाता है।
उनका मत था कि ब्रिटिश अफसरों के सामने गिड़गिड़ाने से कुछ हासिल नहीं होगा। ऐसे में शिवाजी एवं गणपति उत्सव के सहारे तिलक ने देश में जागृति पैदा की। उन्होंने जनमानस में स्वाधीनता की आवाज को पुरजोर बुलंद किया। इसके चलते वे ब्रिटिश सरकार की आंखों में सदैव खटकते थे।
सही भाषा का नहीं इस्तेमाल
अधिकृत सूत्रों की मानें तो संदर्भ पुस्तक में तिलक के बारे में सही भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें शब्दों का चयन भी सही नहीं है। प्रारंभिक तौर पर यह किसी सटीक विचारधारा या विचारों पर चर्चा किए बगैर तथ्य का इस्तेमाल किया जाना प्रतीत होता है
दूसरी किताब नहीं उपलब्ध
विद्यार्थियों की मानें तो अंग्रेजी माध्यम में अन्य कोई किताब उपलब्ध नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार उपलब्ध कराई गई हिंदी की किताब से पढऩे के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मथुरा के प्रकाशक मुकेश की मानें तो किताब बोर्ड के निर्देशानुसार ही पुस्तक प्रिंट की गई है।
इनका कहना है
बोर्ड आठवीं की पुस्तक उपलब्ध नहीं कराता है। यह किताबें एसआईआरटी उदयपुर द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
-डॉ. बी. एल. चौधरी, अध्यक्ष, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
यह दो अलग-अलग विचारधारा वाले लेखकों का मत हो सकता है। राष्ट्रीय विचारधारा से संबंधित लेखक तिलक को स्वाधीनता आंदोलन का नायक मानते हैं। विपरीत विचारधारा के लेखक उनके उग्र विचारों के कारण अलग तरीके से परिभाषित करते हैं। पुस्तक में जिस भी स्तर पर यह लिखा है, उसके तथ्यों की गहराई से जांच होनी चाहिए।
-प्रो. जी. एस. व्यास, सेवानिवृत्त इतिहास विभागाध्यक्ष, मदस विश्वविद्यालय
Published on:
11 May 2018 07:46 am
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