
::निगम को भूमि हस्तांतरित की जाए तो मिले राहत
अजमेर. जिले में सोमवार से शुरू होने वाले महंगाई राहत व प्रशासन शहरों के संग शिविरों को लेकर शनिवार को गांधी भवन सभागार में बुलाई गई बैठक में मूल विषय एक ओर नजर आया। पार्षदों ने पट्टे वितरण तथा एडीए व नगर निगम की भूमि के स्वामित्व स्थानांतरण सहित अन्य मुद्दों पर जिला कलक्टर व अधिकारियों पर कई सवाल खड़े किए। कई पार्षदों ने पट्टा वितरण प्रणाली में अनियमितताओं व जनता को गुमराह करने तक के आरोप लगा डाले। फिलहाल बैठक में सोमवार से शुरू होने वाले राहत शिविरों के लिए फीडबैक लिया गया व शिविरों के क्रियान्वयन के लिए जनप्रतिनिधियों से सहयोग का आग्रह किया गया।
जनता को गुमराह नहीं किया जाए
एडवोकेट पार्षद अजय वर्मा ने कहा कि निगम क्षेत्र की जो भूमि एडीए के नाम हैं। उन्हें नगर निगम को हस्तांतरित की जाए। इस बारे में तत्कालीन जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित के लिखित निर्देशों का भी हवाला दिया गया। इसके बावजूद कार्य अब नहीं हुआ है। इसी प्रकार योजनाएं नगर निगम को हस्तांतरित की जानी चाहिए। जिला कलक्टर अंशदीप ने कहा कि कई खसरों को 90ए कर दी है। इस पर पार्षद अजय वर्मा का कहना था आबादी खसरों पर 90ए किया है जबकि उस पर भू-राजस्व अधिनियम नियम लागू नहीं होता है। इस प्रकार प्रशासन जनता को गुमराह कर रहा है।
कच्ची बस्ती सर्वे का दावा
बैठक में पार्षदों ने कच्ची बस्ती के पट्टों में सड़क की चौड़ाई 15 फिट होने की तकनीकी दिक्कतों को बताया। पार्षद रणजीत सिंह का कहना रहा कि कस्टोडियन भूमि पर पट्टा देने की नीति स्पष्ट नहीं है। जहां तक कच्ची बस्ती है तो वहां के क्षेत्र को डिनोटिफाईड कर सिवायचक घोषित करने के बाद आबादी घोषित हो तब जाकर पट्टे जारी हों। प्रशासन का कहना रहा कि इसका सर्वे करा लिया गया है लेकिन पार्षदों का कहना है कि वह तो आबादी क्षेत्र का सर्वे है। वह तो वैसे हीफ्री होल्ड है। यह तो निगम दे रहा है। बैठक में पार्षद हेमंत शर्मा, श्याम प्रजापति, सोहन रावत आदि ने विचार व्यक्त किए।
Published on:
22 Apr 2023 09:53 pm

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