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यहां भी किए जा रहे हैं सौर ऊर्जा की रोशनी में खास research

- राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी,अजमेर-खुद बिजली उत्पादन कर डिस्कॉम को दे रहा केंद्र
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अजमेर

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Preeti Bhatt

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Updated: 9 Jul 2019, 4:42 PM IST

research in Solar energy lights

यहां भी किए जा रहे हैं सौर ऊर्जा की रोशनी में खास research

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. सरकारी महकमों की ओर से सौर ऊर्जा का उत्पादन न केवल बिजली की बचत कर रहा है, बल्कि आमजन को भी सौर ऊर्जा की अहमियत बताकर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी स्वयं सौलर प्लांट के माध्यम से बिजली का उत्पादन कर रहा है। केन्द्र में सौर ऊर्जा की इस ‘रोशनी’ में ही कृषि के क्षेत्र में खास अनुसंधान किए जा रहे हैं।

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राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी में लगाए गए सौलर प्लांट ने केन्द्र के बिजली पर होने वाले हजारों रुपए के व्यय भार को आधे से भी कम कर दिया है। यही नहीं प्लांट से उत्पादित बिजली को अजमेर विद्युत वितरण निगम को उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां अनुसंधान केन्द्र के मुख्य भवन एवं अन्य भवनों की छत पर करीब 105 किलोवाट का सौलर प्लांट लगाकर सौर ऊर्जा का संचय कर बिजली उत्पादन कर रहा है। कृषि के क्षेत्र में होने वाले महत्वपूर्ण अनुसंधान भी सौर ऊर्जा की रोशनी में हो रहे हैं। चाहे लेबोरेट्री में हों चाहे खुले खेतों में। बीजीय मसालों की फसलों की विशेष किस्मों के साथ, कई उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। वर्षभर के लिए बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के लिए करीब 200 किलोवाट बिजली की आवश्यकता पड़ती है, कुछ महीनों में कम तो कुछ महीनों में बिजली की आवश्यकता अधिक होती है।

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सितम्बर से अप्रेल तक बिजली की डिमांड अधिक

अनुसंधान केन्द्र में सितम्बर से अप्रेल माह में बिजली की डिमांड व खपत अधिक होती है। इनमें लेबोरेट्री के साथ एसी, हार्वेस्टिंग सिस्टम आदि के लिए जरूरत रहती है। जबकि अन्य महीनों में बिजली की खपत कम होती है। इन महीनों में डिस्कॉम में बिजली का संचय होता है।

प्लांट से उत्पादित बिजली डिस्कॉम को दी जा रही है

सौलर प्लांट से उत्पादित बिजली को डिस्कॉम की लाइन से बिजली उप्लब्ध करा दी जाती है। डिस्कॉम से बिजली की आपूर्ति होती है। इससे करीब 50 प्रतिशत बिजली के व्यय की बचत केन्द्र को हो रही है।

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देश के किसान हो रहे प्रेरित

मसाला फसलों का उत्पादन करने वाले किसान भी केन्द्र के सौलर प्लांट से प्रेरित हो रहे हैं। किसान अपने खेतों में सौलर प्लाट लगा रहे हैं। इससे सरकार एवं डिस्कॉम पर बिजली के लिए निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केन्द्र में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों के किसान निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचते हैं।

इनका कहना है...

बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी में 105 किलोवाट का सौलर प्लांट लगाया है। केन्द्र के लिए करीब 200 किलोवाट बिजली की आवश्यकता होती है। बिजली का व्यय आधा हो गया है।

डॉ. गोपाललाल, निदेशक, राबीमअ केन्द्र तबीजी अजमेर