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संस्कृत बनाती है व्यक्ति को संस्कारी

आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग : चित्तौड़ प्रांत विद्या भारती के प्रांत संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने कहा

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संस्कृत बनाती है व्यक्ति को संस्कारी

संस्कृत बनाती है व्यक्ति को संस्कारी

अजमेर.

कार्यकर्ता किसी भी संगठन की महत्वपूर्ण धुरी होते हैं। उनका अपना व्यक्तित्व होता है, जिसके कारण लोग जुड़ते जाते हैं और संगठन एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण करता है, इसलिए प्रत्येक संगठन को श्रेष्ठ और तेजस्वी कार्यकर्ताओं का निर्माण करना चाहिए।

यह बात संस्कृत भारती चित्तौड़ प्रांत द्वारा शहीद अविनाश माहेश्वरी आदर्श विद्या निकेतन विद्यालय, भगवानगंज में सप्त दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग के तृतीय दिन प्रमुख सत्र में चित्तौड़ प्रांत विद्या भारती के प्रांत संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारती संस्कृत के पुनरुत्थान के लिए कार्य कर रहा है।

जो व्यक्ति संस्कृत पढ़ता वह निश्चित रूप से संस्कारी व्यक्तिहोता है। संस्कृत भारती चित्तौड़ प्रांत के संगठन मंत्री देवेंद्र पंड्या ने कहा कि संस्कृत भारती संस्कृत को पुन: जन भाषा बनाने के लिए निरंतर शिविरों का आयोजन करती है। इस आवासीय संभाषण शिविर में राजस्थान के 20 जिलों के 300 से अधिक प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

वरिष्ठ संघ प्रचारक हरि सिंह, संस्कृत भारती चित्तौड़ प्रांत के मंत्री राजेंद्र शर्मा, महानगर अजमेर संयोजक हिम्मत सिंह चौहान, शिविर संयोजक भूपेन्द्र सिंह चौहान, भीलवाड़ा विभाग संयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत, प्रांत शिक्षण प्रमुख मधुसूदन शर्मा, शाहपुरा जिला संयोजक भगवानलाल गोस्वामी, शुभम कुमार, अनिरुद्ध सिंह, मीठालाल माली, देवीलाल प्रजापत आदि मौजूद थे।