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समाज बने पशुओं का पालनहार, इन्हें भी चाहिए दुलार. . .

पशु कल्याण दिवस पर विशेष वेदों में पशु प्रेम के कई प्रसंग हैं। भारतीय संस्कृति में देवताओं के साथ सदैव पशुओं को दिखाया गया। गाय, बछड़े, बैल, मोर आदि कई पशु-पक्षियों का जिक्र आता है। बुधवार को पशु कल्याण दिवस है। पशुओं के प्रति मानव व्यवहार क्या होना चाहिए। पशु इंसान से क्या अपेक्षा करता है इस मानसिकता को समझना होगा।

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अजमेर

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Dilip Sharma

Oct 03, 2023

समाज बने पशुओं का पालनहार, इन्हें भी चाहिए दुलार. . .

समाज बने पशुओं का पालनहार, इन्हें भी चाहिए दुलार. . .

अजमेर. वेदों में पशु प्रेम के कई प्रसंग हैं। भारतीय संस्कृति में देवताओं के साथ सदैव पशुओं को दिखाया गया। गाय, बछड़े, बैल, मोर आदि कई पशु-पक्षियों का जिक्र आता है। बुधवार को पशु कल्याण दिवस है। पशुओं के प्रति मानव व्यवहार क्या होना चाहिए। पशु इंसान से क्या अपेक्षा करता है इस मानसिकता को समझना होगा। पशु का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। पशु या पालतू जानवर परिवार के सदस्य का रूप ले लेता है। स्वयंसेवी संस्थाएं व पशु प्रेमी इस दिन कुछ विशेष करते हैं। पत्रिका ने कुछ पशु प्रेमियों से विशेष बातचीत की।भगवान कृष्ण देते हैं पशु-पक्षी से प्रेम की प्रेरणा

प्रेरणा फाउंडेशन फॉर एनिमल वेलफेयर की निदेशक प्रेरणा यादव ने बताया कि पशुओं के संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधान हैं। श्रीकृष्णा ने गोकुल में संकट के समय गोवर्धन पर्वत के नीचे पशु-पक्षियों को जगह दी थी। आज जंगल,पहाड़, तालाब, नदियों के प्राकृतिक सौंदर्य को खराब किया जा रहा है। मूक पशुओं को अपने रहने के ठिकानों को छोड़ बाहर निकलना पड़ता है। बाहर निकलने का मतलब उसका जीवन संकट में डालना है।-----------------------------------------------------------------------------

पशु भगवान के संगी, इन्हें भी चाहिए दुलारबालुपुरा रोड, आदर्श नगर निवासी एडवोकेट अंजली शर्मा नंदी से विशेष प्रेम रखती हैं। वे सड़क पर घूमते बछड़ों को संरक्षण देती हैं। उन्होंने बताया कि पशुपालक गाय के बछड़ा पैदा होते ही उसे गाय से अलग कर लावारिस छोड़ देते हैं। पिछले 15 सालों से वे ऐसे मूक जानवरों की सेवा कर रही हैं। श्वान व उसके बच्चोें को घर लाकर खाना देती हैं। उन्होंने एक केस के जरिये एक नंदी को पुन: उसकी माता से मिलवाया। अंजली ने बताया कि बेजुबान जानवरों का अहित नहीं करना चाहिए। पशु कल्याण दिवस अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने की जरूरत है।

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पशु रक्षा के कानूनी प्रावधान

- संविधान के अनुच्छेद 53 ए में पशु पक्षियों को खाना दें व ख्याल रखने का मौलिक कर्तव्य।- अनुच्छेद 48 ए में पर्यावरण, जंगल और वन जीवन संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी।

- अनुच्छेद 19 पर्यावरण को सुरक्षा देने का मौलिक अधिकार।

- आर्टिकल 25 से 28 में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और कुछ धर्मों में पशु पक्षियों को खाना खिलाने की बात कही है।

- अनुच्छेद 11 में पशुओं के साथ क्रूरता अपराध।

- अनुच्छेद 506 भादस में जानवरों को खाना खिलाने वालों को डराना, परेशान व प्रताड़ित करना अपराध।

- अनुच्छेद 428 और 429 में जानवर को मारना, जहर देना व अपंग बनाने की शरारत अपराध।

- सुप्रीम कोर्ट के आदेश 2009 - किसी भी श्वान को अपने स्थान से स्थानांतरित किया जाना दंडनीय अपराध। इलाज और वैक्सीन के लिए हटाया जाकर बाद में समान स्थान पर छोड़ने का आदेश।

बन्दर, कछुवा, मोर, तोता आदि घर पर पालना अपराध।

- जन्म नियंत्रण संभव है, पर मारना अपराध।

पशुओं संग व्यवहार राष्ट्र की महानता का परिचायक

"महात्मा गांधी ने कहा था, 'किसी राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।'2019 में हुई पशु गणना के आंकड़े, अब आगामी गणना 2024 में होगी।

अजमेर जिले के पशुओं पर नजर

विदेशी नस्ल के पशु - 80571

देशी नस्ल के पशु - 304086

कुल - 384657

भैंस - 520779

भेड़ - 363893

बकरी - 739132

अन्य - 14910