अजमेर. स्वर्णिम अयोध्या नगरी के लिए विख्यात सोनीजी की नसियां में 140 साल बाद सोमवार से पंचकल्याणक आमजन के लिए खोला गया। आचार्य वसुनंदी और आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने इसका विधिवत लोकार्पण किया। आचार्य वसुनंदी ने ने कहा कि दान-पुण्य सबसे बड़ा धर्म है। व्यक्ति जितना धर्म की तरफ अग्रसर होता है उतना पुण्य बढ़ता है। हिंसा नहीं करना जैन धर्म का मूल सिद्धांत है। जैन धर्म के प्रतीक चिन्ह में भी हथेली पर अहिंसा अंकित है। जैन धर्म से तात्पर्य जिन भगवान के धर्म से है। मन को जीतकर पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने वाले को जिन कहा जाता है।
आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राठौड ने कहा कि जैन धर्म के सिद्धांत पालन से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। विश्वासपात्र बनने के लिए त्याग, तपस्या और बलिदान करना पड़ता है। इस दौरान प्रमोद सोनी ने स्वागत कर एलिवेटेड रोड से हो रही परेशानियों से अवगत कराया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन, नोरत गुर्जर, हेमंत जोधा, अजय कृष्ण तेनगौर, नेता प्रतिपक्ष द्रोपदी कोली, कृपाल सिंह राठौड़, सुनील धानका, नितिन जैन, प्रवीण चंद जैन मिश्रीलाल गदिया, नवीन कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
यह देख सकेंगे लोग
-भगवान को कैवल्य प्राप्ति की प्रतिकृति के रूप में 72 स्वर्णकमल
– कैलाश पर्वत पर 72 त्रिकाल चौबीसी जिनालय
– हस्तिनापुर में भगवान आदिनाथ को इक्षु रसपान और भोजन
– स्वर्णिम रथ, ऐरावत हाथी तथा अन्य रथ