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अजमेर.
जमीन की धोखाधड़ी के मामले में जिला एवं सत्र न्यायधीश अनूपकुमार सक्सेना ने आरोपी को जमानत पर बरी करने के आदेश दिए। न्यायालय ने एक ही मामले को दो थाने में दर्ज करवाकर जांच करने पर पुलिस की कार्यशैली पर संदेह जता पुलिस अधीक्षक को अनुसंधान कर रही सिविल लाइंस थाना पुलिस की भूमिका की जांच कर पन्द्रह दिन में रिपोर्ट तलब की है।
जिला एवं सत्र न्यायधीश अनूपकुमार सक्सेना ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी दिनेश शर्मा के वकील नरेन्द्र सिंह राठौड़ की ओर से धारा 439 में जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपए के बंध पत्र व 25-25 हजार रुपए के दो मुचलके न्याालया में पेश करने पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। वहीं अदालत ने प्रकरण में एसपी से प्रकरण में पुन: 15 दिन में जांच कर पेश करने के आदेश दिए। अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रकरण मं इन्ही तथ्यों पर पूर्व में पुलिस थाना रामगंज में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। ऐसे में क्या परिस्थितियां प्रकट हुई कि प्रकरण को थाना सिविल लाइन्स में दर्जकर अनुसंधान किया जा रहा है। उन्होंने मामले में पुलिस की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए एसपी को प्रकरण की पुन: जांच कर न्यायालय के समक्ष 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।
यह है मामला
अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि आरोपी दिनेश भंडारी के खिलाफ परिवादी जेठानन्द पुत्र रामचन्द्र आडवानी ने 17 सितम्बर 2019 को सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज करवाया कि उसकी एक सम्पति अजयनगर में स्थित है। जहां की स्वामित्व उसकी पत्नी ने नाम है। उन्होंने 2012 में सम्पति की खरीद के बाद में विक्रय धनराशि देकर कब्जा लिया था। उनके परिचित दिनेश भंडारी से सम्पति खरीदने में सहयोग किया। सम्पत्ति खरीदने के बाद दिनेश व मनीष व रणजीत के कहने पर उसने दिनेश व उसके परिवार को मकान रहने के लिए दे दिया। कुछ समय बाद आरोपी ने उसको खाली करवाने का आश्वासन देता रहा। उन्होने बताया कि अभियुक्तगम पहले से ही आपस में षडय़ंत्र किए हुए थे और उन्होंने उसकी सम्पति पर कब्जा करने की नियत से यह सोच समझकर काम किया। परिवादी ने जब सम्पति खरीदी थी तब दिनेश और प्रकाश गवाह बने थे। इसके कारण उन्हें परिवादी की सम्पति होने का पूर्ण ज्ञान था।
Published on:
05 Jan 2020 08:48 am

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