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महिलाएं करेंगी ‘कचरे से कमाई’, छत्‍तीसगढ़ मॉडल देशभर में होगा लागू

महिलाओं को अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने की योजना

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City Garbage

अजमेर शहर में एक स्‍थान पर खुले में लगा कचरे का ढेर और मवेशी।

रमेश शर्मा
अजमेर
स्‍वच्‍छ भारत मिशन के दूसरे चरण में शहरों को कचरा मुक्‍त करने के लिए ब्‍लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। देशभर के शहरों को अपशिष्ट प्रबंधन में छत्तीसगढ़ मॉडल को लागू किया जाएगा। देश में मौटे तौर पर छत्तीसगढ़ के कई शहरों ने पिछले कुछ वर्षो में अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर व्यावहारिक बदलाव लाने में ठोस पहल कर ख्‍याति अर्जित की है।
छत्‍तीसगढ़ मॉडल के आधार पर कचरा मुक्त शहरों के लिए सामाजिक उद्यम अपशिष्ट प्रबंधन में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है। महिलाओं को स्‍वच्‍छता चैंपियन बनाकर यह सिखाया जाएगा कि कैसे स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों में हिस्सा लेकर उनका जीवन बदल सकता है और वे बेहतर जीवन जी सकती हैं। राजस्‍थान दूसरे प्रदेशों से पिछड़ा हुआ है और फिलहाल देश मे 12वीं रैंक पर है। यहां नगर निकायों के लिए सॉलिड वेस्‍ट का प्रबंधन करने के साथ सार्वजनिक शौचालयों को साफ रखने, खुले कचरा डिपो खत्म करने, कचरे का सेग्रीगेशन, जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने जैसी कई बड़ी चुनौतियां हैं। छत्‍तीसगढ़ के सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल से यहां के नगर निकायों के लिए सामने भी कमाई के अच्‍छे मौके हैं।
छत्‍तीसगढ़ मॉडल का अध्ययन और देशभर में लागू करने का रोडमैप बनाने के लिए केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से 3 मार्च को रायपुर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया। 'कचरा मुक्त शहरों के लिए राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्ययोजना' बनाने और 'अपशिष्ट प्रबंधन में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने' के लिए इस बात पर चर्चा की गई कि इस मॉडल से देशभर में कैसे लागू किया जाए और अन्‍य शहरों के निकायों को कैसे प्रेरित किया जाए। इसमें देश भर के चुनिंदा प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया।
अंबिकापुर और पाटन रोल मॉडल
अंबिकापुर शहर और दुर्ग जिले के पाटन नगर का कचरा प्रबंधन सिस्‍टम देश के लिए 'रोल मॉडल' है। इसकी दो विशेषताएं हैं, पहला यह कि अंबिकापुर में कोई कचरा डंपिग यार्ड नहीं है। दूसरा इस सिस्टम को स्‍वयं सहायता समूह के जरिये महिलाएं ही संचालित करती हैं। सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिलता है। दोनों नगरों के स्‍वच्‍छता मॉडल देखने कई अफसरों की टोलियां आती हैं। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, यूजर चार्ज और बायो वेस्ट से इतनी कमाई हो रही है कि स्‍वच्‍छताकर्मियों के मानदेय, कचरा संग्रहण वाहनों के ईंधन पर कोई अलग बजट नहीं है।

कैसे होगा वेस्‍ट मैनेजमेंट
स्‍वच्‍छ भारत अभियान के दूसरे चरण में शहरी क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण की दृष्टि से कचरा प्रबंधन का महत्व समझाने, कचरे के संग्रहण, छंटाई, री-साइक्लिंग, उचित निपटान के तरीके तथा कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया की जानकारी देने पर जोर रहेगा। सबसे पहले निकायों की क्षमता बढ़ाने की पहल करने के साथ संसाधनों का मूल्‍यांकन, फिजिकल के साथ वेबिनार या ई-लर्निंग प्रशिक्षण, स्वच्छताकर्मियों के कौशल विकास के लिए अन्‍य महकमों, संस्‍थाओं और प्रतिष्‍ठानों की मदद लेने पर जोर रहेगा। विकेंद्रीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जनस्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण से जुड़े संगठनों की सहभागिता बढ़ाई जाएगी।

इस तरह होंगे काम
- सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट का मैनेजमेंट
- सूखे कचरे को छांटकर छोटे हिस्सों में बांटना
- कूड़ा फेंकने वाले स्थान को दुरुस्त करना
- मलयुक्त गाद उपचार संयंत्र
- कचरे का सदुपयोग और गंदे पानी का पुन:उपयोग
- आवारा पशुओं के लिए कचरे से हटाकर चारा प्रबंधन

इनका कहना है ...
अपशिष्ट पदार्थों के सकारात्मक उपयोग के लिए नगर परिषद की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्लांट लगाया है। इससे खाद व अन्य उपयोग लिया जा सकेगा। अभी यहां पर महिला स्वयं सहायता समूह इनसे जुड़ा कार्य नहीं कर रही है, लेकिन आने वाले समय में इनको प्रशिक्षण देकर इस कार्य से जोड़ा जा सकता है।
नवीन भारद्वाज आयुक्त नगर परिषद सवाई माधोपुर

कैप्‍शन...
अजमेर शहर में एक स्‍थान पर खुले में लगा कचरे का ढेर और मवेशी। इस तरह की तस्‍वीरें स्‍वच्‍छ भारत मिशन को मुंह चिढ़ा रही हैं।

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