
ब्रांडेड के नाम पर 20 गुना अधिक दर में दवाइयां बेच रहे निजी अस्पताल
चन्द्रप्रकाश जोशी
अजमेर (Ajmer). सरकारी अस्पतालों (Govt. Hospitals)में नि:शुल्क दी जा रही जैनरिक दवा के समान साल्ट की दवाओं की बिक्री के मामले में शहर के निजी अस्पताल मरीजों की जेब काट रहे हैं। एक ही तरह के साल्ट की दवा निजी अस्पताल (Privet Hospitals) की दवा दुकानों पर 20 से 30 गुना अधिक दर पर बेची जा रही है। पत्रिका ने पड़ताल की तो हालात चौंकाने वाले सामने आए। पत्रिका टीम ने शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में संचालित दवा दुकानों (Shopes)पर कुछ दवाइयों की रेट पता करने के साथ खरीद भी की। इनमें सरकारी जैनरिक दवाइयों के मुकाबले जो रेट है वह 20 से 30 गुना ली गई। जैनरिक दवाइयों (Generic Medicines) के मुकाबले इन ब्रांडेड दवा को क्वालिटी एवं कम समय में रिलीफ मिलने के नाम से बेचा जा रहा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ये दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध करवाई जा रही है। मगर सरकार की ओर से जब रेट लिस्ट को देखा गया तो सामने आया कि जिस जैनरिक दवा की लागत मात्र 20 पैसे (प्रति टेबलेट) है वही 6 रुपए से 6.50 रूपए प्रति टेबलेट के हिसाब से मरीजों व आमजन को बेची जा रही है। 35 पैसे की लॉसाल्टन-50 बाजार में साढ़े छह रुपए में, 22 पैसे की एस्प्रीन 5 से 7 रुपए में तो मॉक्सीक्लेव टेबलेट 3.66 20 से 22 रुपए में बेची जा रही है। सर्जरी के बाद एंटीबायोटिक के रूप में दी जाने वाली सेफ्र्रोक्सीन एक्सिल एन एन्टीबायोटिक टेबलेट की आरएमएससी (सरकारी रेट) मात्र 4.40 रुपए है, जबकि यही टेबलेट (Tablet) निजी अस्पताल में 80 से 120 प्रति टेबलेट के नाम से बेची जा रही है। इन दवाइयों को ब्रांडेड के नाम से बेची जा रही है।इन दवाइयों की रेट में हजारों का अंतर-हार्ट अटैक के समय लगाया जाने वाला न स्ट्रेपटोकिनेस इंजेक्शन 16 एलएसी यूनिट्स की सरकारी खरीद रेट 574 रुपए प्रति वायरल (इंजेक्शन) है मगर वही निजी अस्पतालों (Privet Hospitals) एवं उनके मेडिकल स्टोर पर इनकी रेट 2300 से 5000 रुपए तक है। वहीं आंखों की सर्जरी के लिए लैंस (फोल्डेबल इन्ट्रा ऑक्यूलर लैंस) की सरकारी खरीद की कीमत 634 रुपए प्रति लैंस है जबकि बाजार में प्राइवेट अस्पतालों में यही ब्रांडेड के नाम से 10 से 20 हजार रुपए में बेचा जा रहा है।
एक्सपर्ट व्यू
जैनरिक दवाइयों (Generic Medicines) के सॉल्ट एवं अधिकांंश ब्रांडेड दवाइयों के साल्ट समान होते हैं। ब्रांडेड हो चाहे जैनरिक सभी में साल्ट समान होते हैं। अधिकांश दवा कंपनियां जैनरिक दवा की पैकिंग एवं कवरिंग को नया कलेवर दे देती है। जिन दवा कंपनियों के लाइसेंस निरस्त हो जाते हैं वे बाद में जैनरिक दवाइयों का निर्माण करते हैं। जैनरिक दवाइयां कारगर हैं। मगर कुछ डॉक्टर जल्दी रिलीफ के नाम पर ब्रांडेड दवाइयां लिखते हैं। जबकि मरीज को जैनरिक व ब्रांडेड का अंतर भी मालूम नहीं होता है।
डॉ. मोहित दवे, नियंत्रक जिला औषधि भंडार
लो कॉस्ट की जेनरिक अच्छी क्वालिटी की है- जैनरिक दवाइयां दो तरह की होती हैं। वर्तमान में जो दवाइयां सप्लाई हो रही हैं वे लो कॉस्ट जैनरिक दवाइयां हैं। इन पर कंपनी का नाम नहीं होता है। दूसरी वे जैनरिक दवाइयां होती हैं जो जिन पर कंपनियों के नाम होते हैं, जिन्हें ब्रांडेड दवा कहते हैं। वास्तव में जैनरिक दवा तो यूएसए में मिलती है। राजस्थान में राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी (आरएमसीएल ) की ओर से मिलने वाली लो कॉस्ट जैनरिक दवा अच्छी क्वालिटी की मिल रही है। इससे मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। वरना सरकारी अस्पतालों में इतनी भीड़ नहीं पड़ती।
डॉ. संजीव माहेश्वरी, वरिष्ठ आचार्य (फिजिशियन) जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर
Published on:
26 Sep 2019, 1:15 PM IST
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