
बारिश का पानी खदानों ने रोका,तालाब कैसे भरेंगे!
खरवा (अजमेर) बारिश वैसे ही औसत कम हो रही है। इसके चलते बांध-तालाब खाली पड़े हैं। भू-जल स्तर पाताल में चला गया। कुएं-बावड़ी सूखे पड़े हैं। तालाब रीते होने से भू-जलस्तर काफी गिर गया। पिछले कई सालों से शक्ति सागर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हैं। कभी यह तालाब पानी से लबालब रहता था। आज हालात विकट हो गए हैं।
हजारों बीघा जमीन व हजारों लोगों की प्यास बुझाने वाले शक्तिसागर तालाब में पानी सिमट गया है। उसकी वजह बारिश का पानी जिस रास्ते आता है। इस मार्ग में कई खदाने बाधक हैं। यहां गहरी खाइयां बन गई है। बारिश का पानी इन खदानों में भरेगा। इसके ओवरफ्लों होने के बाद पानी तालाब तक जाएगा।
तालाब की आव रुकने के मामले में पूर्व सरपंच राव चंद्रसेन ने ग्रामीणों के सहयोग से एन.जी.टी. कोर्ट भोपाल में परिवाद भी दायर किया हुआ है। शक्तिसागर तालाब की आव रोकने वाली तालाब के पास की दो पट्टाशुदा खदाने है। तालाब में पानी रोकने के बारे में प्रशासन कभी गंभीर नहीं रहा।
भूजल स्तर पहुंचा 200 फीट गहरा
क्षेत्र का प्रमुख जल स्त्रोत शक्तिसागर तालाब वर्षो से खाली पड़ा है। क्षेत्र की जमीन का भूजल स्तर काफी गहरा चला गया। क्षेत्र के 100 से 150 फीट गहराई के कुओं में पानी सूख गया है। 200 फीट की गहराई के बोरवेल में कभी -कभी पानी आता है। जानकारों के अनुसार जल स्त्रोतों के पास की खदानों की गहराई १०० से २०० फीट होने से वहां की जमीने सूखने के चलते जल स्तर काफी गहरा चला
गया है।
पानी बचाओ का नारा बेमानी
सरकार मानसून के समय ही नहीं हमेशा पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने मे करोड़ों रुपए खर्च करती है,लेकिन सरकार की योजना को प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा। इसके चलते लक्ष्य का गुडग़ोबर एक हो रहा है।
उजड़ रहा कृषि व्यवसाय
शक्तिसागर तालाब में पानी नहीं आने से खरवा की प्रमुख खरबूजा, टमाटर, मटर व भींडी की खेती चौपट हो रही है। तालाब के पास खदाने होने से पानी नहीं आ रहा। इसके चलते आमजन पानी की समस्या से जूझ रहा है। गत कई वर्षो से टमाटर व खरबूजे की पैदावार शून्य के बराबर हो गई है। तालाब में पानी के अभाव में अन्य फसलों की खेती भी चौपट हो गई।
तालाब के पास खदाने
खरवा में शक्तिसागर तालाब को सजोएं रखना तो दूर तालाब के केच मेंट से मात्र चार-पांच सौ मीटर की दूरी पर ही खनन विभाग द्वारा पट्टाशुदा खदाने हैं। इनकी गहराई इतनी है कि तालाब में पानी भेजने वाली पहाडिय़ों को खोद कर १००-१५० फीट गहरी खाइयां बना दी गई। इससे पानी की आवक रोक दी। इससे तालाब में पानी नहीं जा रहा है। खदान में भरने वाले पानी को खदान संचालक साल भर बेचता है।
Published on:
21 Jun 2019 01:42 am

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