अजमेर

भाजपा में जिलाध्यक्ष बदले जाने की सुगबुगाहट, गुटबाजी और निष्क्रिय पदाधिकारियों पर गिरेगी गाज

- संगठन स्तर पर चर्चा शुरू, दिसंबर अंत तक हो सकता है बदलाव - पार्टी को नगर निकाय, पंचायत चुनाव में मुंह की खानी पड़ी - बदले जा सकते हैं सगठनात्मक प्रभारी भी नगर निकाय व पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली करारी हार के बाद अब धौलपुर में पार्टी का जिलाध्यक्ष बदले जाने की सुगबुगाहट चल रही है। दरअसल, प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव में हार के बाद भाजपा ने एक दर्जन जिलाध्यक्षों और गुटबाजी में लिप्त निष्क्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की दिशा में काम शुरू कर दिय

2 min read
Nov 18, 2021
Rajasthan Local Body Election 2019: प्रदेश के 49 निकायों में शनिवार को पड़ेगे वोट

धौलपुर. नगर निकाय व पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली करारी हार के बाद अब धौलपुर में पार्टी का जिलाध्यक्ष बदले जाने की सुगबुगाहट चल रही है। दरअसल, प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव में हार के बाद भाजपा ने एक दर्जन जिलाध्यक्षों और गुटबाजी में लिप्त निष्क्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इस संबंध में संगठन स्तर पर चर्चा शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि दिसंबर तक पार्टी में बदलाव की बयार देखने को मिलेगी। पार्टी धौलपुर, अलवर, उदयपुर और चित्तौडग़ढ़ सहित दर्जनभर जिलों में बदलाव को लेकर गंभीर नजर आ रही है।
मिल रही गलत क्रियाकलापों की जानकारी

बताया जा रहा है कि पार्टी को लगातार कई जिलों से जिलाध्यक्षों के गलत क्रियाकलापों की जानकारी मिल रही है। जिलाध्यक्षों के गलत रवैये के कारण पार्टी धौलपुर समेत इन जिलों में कमजोर भी हो रही है। जिसके चलते भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ इन जिलाध्यक्षों को हटाने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। जल्द ही इन जिलाध्यक्षों को बदला जाएगा। निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाने के संबंध में पूनियां पहले ही बयान दे चुके हैं। यही नहीं कई पदाधिकारियों की भूमिका भी सही नहीं मिली है। ऐसे में पार्टी योग्य लोगों को प्रदेश कार्यकारिणी में पद देकर नवाजेगी।

प्रभारी भी बदले जा सकते हैं

पार्टी कई जिलों में संगठनात्मक प्रभारी बदलने का भी काम करेगी। खासकर जिन जगहों पर पार्टी को पंचायत, जिला परिषद चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इन चुनाव में संगठनात्मक प्रभारियों की भूमिका सही नहीं मिली है। इस वजह से पार्टी 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी को बूथ लेवल तक मजबूत करेगी।

धौलपुर में मुंह की खाई

पार्टी ने हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में मुंह की खाई थी। पार्टी छह पंचायत समितियों में से सिर्फ एक सैंपऊ में प्रधान बना सकी। यहां भी उप प्रधान चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को बहुमत के बावजूद एकमात्र वोट मिल सका। जिला प्रमुख के चुनाव में भी पार्टी क्रॉस वोटिंग का शिकार हुई। पार्टी के छह सदस्य होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी को मात्र चार ही वोट मिल पाए।

Published on:
18 Nov 2021 01:26 am
Also Read
View All

अगली खबर