
राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र , तबीजी, अजमेर
अनिल कैले
अजमेर. राजस्थान में बीजीय मसालों की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर आई है। अब उन्हें उच्च गुणवत्ता के बीज अजमेर से उपलब्ध हो सकेंगे। इसके लिए अजमेर के तबीजी स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में बीज प्रसंस्करण संयंत्र लगाया जा रहा है। इस संयंत्र से प्रमुख बीजीय मसाले जीरा, धनिया, अजवायन, सौँफ, कलौंजी और मेथी के उच्च गुणवत्ता के बीज तैयार किए जाएंगे। केन्द्र में संयंत्र के अलावा बीजों को रखने के लिए 100 क्विंटल क्षमता का गोदाम भी बनाया जाएगा।
किसानों के लिए खास योजना
केन्द्र के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र नाथ सक्सेना ने बताया कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के बीज डिवीजन ने किसानों को बीज प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना के तहत इस संयंत्र को लगाने की स्वीकृति प्रदान की है। यह संयंत्र एक एकड़ में लगाया जाएगा। संयंत्र लगाने पर करीब 120 लाख रुपए का खर्च आएगा। संयंत्र केन्द्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग बनाएगा। इसका कार्य इस वर्ष दिसम्बर में शुरू होगा और अगले वर्ष जुलाई तक पूरा हो जाएगा।
12 जिलों को होगा फायदा
बीज प्रसंस्करण संयंत्र परियोजना के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बाजार में बीजीय मसालों के उच्च गुणवत्ता के बीजों की काफी कमी महसूस की जा रही है। इस संयंत्र के लगने से धनिया, कलौंजी, सौंफ, जीरा, अजवायन और मेथी के अच्छे बीज उपलब्ध हो सकेंगे। इन बीजों की मांग मुख्यत: बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, अजमेर, नागौर, पाली, सिरोही, कोटा, बूंदी, प्रतापगढ़, सीकर और चूरू जिले में होती है।
हर साल 1000 क्विंटल बीज का प्रसंस्करण
कृषक सहभागिता बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत स्थापित किए जा रहे इस संयंत्र में प्रति घंटा एक टन बीजीय मसालों के बीजों का प्रसंस्करण किया जाएगा। तबीजी केन्द्र में फिलहाल छोटा संयंत्र चल रहा है जिसमें प्रति वर्ष 300 क्विंटल बीज का प्रसंस्करण किया जा रहा है। नए संयंत्र से प्रति वर्ष 1000 क्विंटल बीज का प्रसंस्करण किया जाएगा। नया संयंत्र लगने से किसानों को उच्च गुणवत्ता का बीच उपचार सहित वाजिब दाम पर मिल सकेगा। फिलहाल तबीजी केन्द्र बीजीय मसालों के बीज 350 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध करा रहा है। बताया जाता है कि बाजार में यह बीज करीब दो गुना दाम में मिल रहे हैं।
चार मशीनें लगेंगी
डॉ. संजय ने बताया कि संयंत्र में चार मशीनें लगाई जाएंगी। स्वदेशी तकनीक पर आधारित स्वचालित इन मशीनों की देखरेख के लिए दो व्यक्ति नियुक्त किए जाएंगे। पहली मशीन (प्री क्लीनर कम ग्रेडर) बीजों से मिट्टी, पत्थर, कंकर और पौधे के अवशेषों को अलग करेगी। दूसरी मशीन (स्पेस्फिक ग्रेविटी सेपरेटर) गुणवत्ता के आधार पर बीजों को विभक्त करेगी। तीसरी मशीन (सीड ट्रेटर) बीजों को उपचारित करने में उपयोग होगी ताकि बीजों का खेतों में जमाव अच्छा हो और बीजों को अंकुरण के समय बीमारियों से बचाया जा सके। चौथी मशीन (वेइंग एण्ड पैकेजिंग) बीजों की तुलाई और पैक करने का काम करेगी।
Published on:
19 Oct 2022 09:36 pm
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