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रक्तिम तिवारी/अजमेर.
सिंचाई विभाग में बर्बाद हुए हाईटेक मौसम स्टेशन को सरकार भुला चुकी है। मौसम के आकलन के लिए उपयोगी साबित होते, लेकिन सरकार ने इन्हें दोबारा चालू करने की जरूरत नहीं समझी है। अब विभाग के पास मौसम का पूर्वानुमान और आकलन का कोई साधन नहीं है।
वर्ष 1997-98 में सिंचाई विभाग में विशेष मौसम स्टेशन बनाए गए थे। जिले में अजमेर, ऊंटड़ा, नारायण सागर, डाई नदी, टॉडगढ़, लसाडिय़ा में यह स्टेशन तैयार किए गए। यहां हाइटेक मशीन लगाई गई। साथ ही हाइड्रॉलिक विंग बनाकर स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया। शुरुआती दौर में तो इन स्टेशन पर कामकाज हुआ, लेकिन वक्त के साथ इन्हें भुला दिया गया। स्टाफ को दूसरे महकमों में भेजने से हाईटेक स्टेशन बंद हो गए।
बजट की कमी, उपकरण खराब
प्रत्येक मौसम स्टेशन में इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, चौकीदार लगाए गए थे। यहां ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से विशेष उपकरण और मशीन मंगवाई गई। सरकार से इन्हें प्रतिवर्ष 2 से 5 लाख रुपए बजट मिलता था। बाद में बजट मिलना बंद हो गया। बजट की कमी के चलते उपकरण खराब होते चले गए। यह उपकरण और मशीन अब नजर भी नहीं आते हैं।
केवल बरसात ही नापता है विभाग
सिंचाई विभाग साल में चार महीने सिर्फ बरसात ही मापता है। प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक मानसून का दौर माना जाता है। इस दौरान जिले में होने वाली बरसात और जलाशयों में पानी की आवक का विभाग प्रतिदिन रिकॉर्ड तैयार करता है। लेकिन इनके लिए जलाशयों अथवा पुलिस थानों में लगे गेज पर ही निर्भर है। कई बार जलाशयों के वास्तविक गेज और बरसात की सूचनाओं में फर्क मिलता है।
नहीं है शहर में ज्यादा वर्षामापी यंत्र
शहर में जयपुर रोड पर सिंचाई विभाग और रामगंज स्थित मौसम विभाग में वर्षामापी यंत्र है। दोनों विभागों इन क्षेत्रों में होने वाली बरसात के आधार पर आंकड़ा बताते हैं। अगर शहर के वैशाली नगर, लोहागल, फायसागर क्षेत्र, कोटड़ा, शास्त्री नगर या किसी दूसरे इलाके में ही अतिवृष्टि हो जाए तो दोनों महकमे इका आकलन अथवा आंकड़ा नहीं बता सकते हैं।
वरना यह हो सकता है लाभ
-जलाशयों, तालाब और नदियों में सटीक गेज
-हवा में नमी अथवा सूखेपन का आकलन
-अतिवृिष्ट या कम बरसात होने का अनुमान
-शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अध्ययन-अध्यापन में लाभ
-संस्थाओं में मौसम आधारित पाठ्यक्रमों की शुरुआत
Published on:
16 Feb 2019 07:20 am
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