12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

लॉकडाउन : खूब किया इंतजार,आखिर सुन गई सरकार, घर जाने की खुशी में छलके आंसू

अजमेर जिले से बिहार प्रदेश के कई श्रमिक स्पेशल ट्रेन से हुए रवाना,लॉकडाउन के चलते क्वॉरंटीन में रुके थे सैकड़ों मजदूर, लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने से श्रमिकों को सताई रोजीरोटी की चिंता,फै क्ट्री मालिकों व ठेकेदारों ने नहीं ली सुध,कई मजदूर पैदल निकले तो कुछ चोरी-छुपे वाहनों से हुए रवाना

3 min read
Google source verification
लॉकडाउन : खूब किया इंतजार,आखिर सुन गई सरकार, घर जाने की खुशी में छलके आंसू

केकड़ी से अजमेर रवाना होने के लिए बस में बैठे बिहारी श्रमिक।

ajmer अजमेर. कोरोना के चलते lock dowan लॉकडाउन में फंसे बिहार निवासी सैंकड़ों श्रमिक speical train स्पेशल ट्रेन से अपने-अपने घर के लिए रवाना हो गए। इस दौरान मजदूरों के चेहरे पर खुशी थी। घर जाने की कई दिनों से आस लगाए बैठे थे, लेकिन परिवहन साधन नहीं मिले। फिर प्रशासन ने क्वॉरंटीन में रख दिया। पुलिस की भी सख्ती रही।

वैसे इनके रहने,खाने व मनोरंजन की तमाम व्यवस्थाएं थी, लेकिन घर-परिवार की फिक्र सताती रही। यह मजदूर लॉकडाउन के दूसरे चरण तक तो शांत थे,लेकिन तीसरे चरण की घोषणा होते ही सब्र का बांध टूट गया। इन मजदूरों में किसी के पास पैसा खत्म हो गया तो कोई फिर से इधर नहीं रहना चाहता था। प्रशासन ने बुधवार को अजमेर, ब्यावर, मसूदा, अरांई, रूपनगढ़ व खरवा सहित कई गांवों से यात्री बसों के जरिए इन मजदूरों को अजमेर स्थित रेलवे स्टेशन पहुंचाया।

केकड़ी क्षेत्र से 172 श्रमिक

केकड़ी में अटके 172 बिहार के श्रमिकों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। कई महिलाएं तो भावुक हो गई। प्रशासन ने कारखानों एवं अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे श्रमिकों को 4 बसों से अजमेर भिजवाया। इससे पहले सभी श्रमिकों की स्क्रीनिंग कराई गई।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इन्हें मास्क, सेनेटाइजर आदि बांटे गए। बुधवार सुबह पटेल मैदान में सभी श्रमिकों को एक जगह एकत्रित किया गया। पटवारी, गिरदावर एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रमिकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच पड़ताल के बाद सभी को अजमेर रवाना किया।

9 स्पेशल बसों की व्यवस्था

ब्यावर से 406 श्रमिकों को नौ बसों के जरिए अजमेर भेजा गया। श्रमिकों को पहुंचाने के लिए बस स्टैंड पर दिनभर रेलमपेल रही। कांग्रेस पदाधिकारियों ने जननायक रसोई के जरिए इनके भोजन की व्यवस्था की। ब्यावर सहित आस-पास के क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिक साधन नहीं मिलने से अटके हुए थे। ब्यावर आगार प्रबंधक रघुराजसिंह ने बताया कि इन मजदूरों के लिए स्पेशल बसें लगाई गई।

इसी प्रकार खरवा क्षेत्र से सवा दो सौ श्रमिकों को बिहार के लिए रवाना किया। इस दौरान महिलाओं व बच्चों में काफी उत्साह रहा। ऐसे 225 बिहार के श्रमिक कई दिनों से अलग-अलग जगह रुके हुए थे। मसूदा तहसील की अंधेरी देवरी, लुलवा, खरवा, कानाखेड़ा, पीपलाज व देवपुरा पंचायत के गांवों में यह मजदूर काम करते थे। प्रशासन ने बिहार जाने वालों का सर्वे कर ऑनलाइन आवेदन लिया था।

पहले श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच

बिजयनगर में लघु औद्यागिक इकाइयों में कार्यरत बिहार प्रदेश के मजदूर अजमेर से श्रमिक रेल सेवा के जरिए अपने प्रदेश के लिए रवाना हुए। बिजयनगर शहरी क्षेत्र में कई मजदूर लॉकडाउन के चलते फंसे हुए थे। इनमें से कई श्रमिक क्वॉरंटीन में रहे। यहां से करीब 47 मजदूरों को तहसीलदार स्वाती झा, गिरदावर प्रदीप तिवाड़ी, उद्योग संघ के अध्यक्ष विमल धम्माणी सहित अन्य ने यात्री बसों के जरिए अजमेर रेलवे स्टेशन तक रवाना किया। इससे पहले इनके स्वास्थ्य की जांच की गई।

रूपनगढ़ व अरांई क्षेत्र के 304 मजदूर

रूपनगढ़ की औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत करीब 130 बिहार के मजदूरों को अजमेर रेलवे स्टेशन तक छोड़ा गया। इन मजदूरों ने प्रशासन, पंचायत व मार्बल ऐसोसिएशन से गन्तव्य को भेजने के लिए गुहार लगाई थी।

इससे पहले सोमवार व बुधवार को सभी श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच की गई। बुधवार को एसडीएम भंवरलाल जनागल, तहसीलदार भंवरलाल कूकणा, थानाप्रभारी मानवेन्द्रसिंह भाटी की मौजूदगी में आदर्श ग्राम पंचायत के सरपंच हाजी इकबाल छीपा, मार्बल ऐसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश कुमार मोदाणी, उपाध्यक्ष रामबिलास थाकण, कोषाध्यक्ष चैतन भैंसा सहित पदाधिकारियों ने इन मजदूरों को अजमेर के लिए रवाना किया।

अरांई. तहसील प्रशासन ने बुधवार को 174 मजदूरों को बसों से अजमेर के लिए रवाना किया। घर जाने की खुशी मजूदरों के चहरे पर साफ नजर आ रही थी। अरांई क्षेत्र में गैस पाइप लाइन, हाईटेंशन बिजली की लाइन कार्य करने तथा आइसक्रीम फैक्ट्री में मजदूरी करने के लिए बिहार के अलग-अलग जगह से मजदूर आए हुए थे। मार्च माह में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही मजदूर बेरोजगार थे।