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WORLD TEA DAY : राजस्थान के इस शहर में 7 अरब की चार गटक जाते हैं लोग

चाय का चस्का अजमेर में 54 करोड़ रुपए सालाना होते हैं सिर्फ पत्तियों पर खर्च 72 : करोड़ से अधिक कप की होती है खपत 02 : चाय व्यापारी सहित 10 एजेंट अजमेर में 100 : से 300 रुपए किलो तक की होती है बिक्री

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WORLD TEA DAY : राजस्थान के इस शहर में 7 अरब की चार गटक जाते हैं लोग

WORLD TEA DAY : राजस्थान के इस शहर में 7 अरब की चार गटक जाते हैं लोग

दिनेश कुमार शर्मा

अजमेर.

कभी फिरंगियों द्वारा लगाया गया चाय का चस्का अब लोगों को कितना महंगा पड़ रहा है आप इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते। यह सुनकर आपका चौंक जाना लाजिमी है कि अजमेरवासी सालभर में 7 अरब रुपए से अधिक की चाय गटक जाते हैं।

आंकड़ों की मानें तो शहरवासी साल में 72 करोड़ कप चाय की चुस्कियां लेते हैं। इनमें करीब 54 करोड़ रुपए अकेले चाय की पत्तियों पर खर्च होता है।

इससे करीब दस गुना अधिक खर्च दूध, चीनी, अदरक और इलायची पर होता है जो इस चाय को जायकेदार बनाने के लिए डाले जाते हैं।

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हालात यह हैं कि अधिकांश लोगों की सुबह अब बैड टी से होती है तो मेहमाननवाजी भी चाय बिना अधूरी मानी जाती है।

थोक विक्रेता दादनदास फुलवानी ने बताया कि आसाम से उनके यहां 7 सहित करीब 15-16 ट्रक में 1.5 लाख किलो चाय की पत्तियां (सीटीसी) अजमेर लाई जाती हैं।

आसाम में करीब 800 बागान हैं, जहां 100 रुपए से 5000 रुपए किलो तक की चाय मिलती है। महंगी चाय का रूस, अमरीका सहित अन्य देशों में निर्यात होता है।

अजमेर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में 100 से 300 रुपए किलो तक की चाय की बिक्री होती है। इसमें 6-7 रुपए प्रतिकिलो किराया खर्च जुड़ जाता है।

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लेमन और ग्रीन टी का चलन

चाय विक्रेता मनोहर तारानी के अनुसार चाय की ग्रेड में मोटी, मीडियम और बारिश पत्तियां शामिल हैं। इनमें घरों के लिए जहां मोटी पत्तियां खरीदी जाती हैं, वहीं चाय की दुकानों के लिए बारीक पत्तियां पसंद की जाती हैं।

लेमन टी के साथ अब ग्रीन टी का चलन भी बढ़ गया है। सर्दियों में चाय की खपत बढ़ जाती है।

क्यों मनाते हैं इंटरनेशनल टी-डे

बागान में मजदूरी के हालात, हक, मजदूरी, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य योगदान पर चर्चा और चाय मजदूरों और उत्पादकों की स्थिति बेहतर बनाने के प्रयास करने को लेकर चाय दिवस मनाया जाता है।

चाय के प्रमुख उत्पादक देश

भारत, श्रीलंका, चीन, केन्या, वियतनाम समेत चाय के प्रमुख उत्पादक देशों और बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, तंजानिया, युगांडा, मलावी आदि में चाय दिवस मनाया जाता है।

मुफ्त में लगा चस्का

ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 111 साल पहले चाय की पत्तियां मुफ्त बांटकर देश में चाय का चस्का लगाया। इसके बाद सन् 1835 से बागान लगाकर चाय यूरोप भेजने लगे।

इसके बाद 1907 में भी चाय के सैंपल मुफ्त बांटकर चाय के चस्के को घर-घर पहुंचा दिया।