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Rinku Singh IPL 2023: इन 3 मुस्‍लिमों के सहारे रिंकू सिंह के चमक गए सितारे! वरना अंडर 16 ट्रायल में ही खत्म था करियर?

जिद, जुनून और जज्बा के बदौलत अलीगढ़ के रिंकू सिंह ने रचा इतिहास। पिता गैस सिलेंडर बांटते, भाई ऑटो चलाता लेकिन इन 3 मुस्लिमों के सहारे रिंकू सिंह के सितारे आसमां में बुलंद हो गए।

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किसी ने कभी सोचा नहीं होगा कोचिंग सेंटर में पोंछा लगाने वाला एक लड़का ऐसा कारनामा करेगा कि उसकी खुशी की गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। कब, किसकी जिंदगी, कैसे, कहां? बदल जाए कोई कह नहीं सकता, लेकिन जिद, जुनून और जज्बा के बदौलत एक लड़के ने अपनी सिर्फ जिंदगी ही नहीं बदली है बल्‍कि पूरे देश में एक संदेश दे दिया कि अगर सपने पाने की चाहत है तो चमत्कार आप कर सकते हैं।

रिंकू सिंह ने किया चमत्कार, आखिरी ओवर में पलट दी बाजी
अलीगढ़ के स्टार क्रिकेटर और केकेआर के खिलाड़ी रिंकू सिंह के साथ ऐसा ही चमत्कार हुआ है। 9 अपैल को कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात टाइटन्स के बीच खेले गए मुकाबले में बाएं हाथ के बल्लेबाज रिंकू सिंह ने मुकाबले के आखिरी ओवर में ऐसा अद्भुत खेल दिखाया, जिसकी तारीफ करने के लिए शब्द कम पड़ गए।

6 गेंदों में मारे 5 छक्के, दिला दी जीत
कोलकाता नाइटराइडर्स के युवा बल्लेबाज रिंकू सिंह ने वह कर दिखाया जो कई सालों में कोई क्रिकेटर कर पाता है। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ रविवार (नौ अप्रैल) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आखिरी ओवर में लगातार पांच छक्के लगाकर कोलकाता को अविश्वसनीय जीत दिला दी।

घर में थी गरीबी, लेकिन जिद थी खेलेंगे क्रिकेट ही, 2009 में थामा बल्ला
कभी कोचिंग सेंटर में पोंछा लगाने वाला लड़का आज कोलकाता का नया हीरो बन गया है। गैस एजेंसी में हाकर का काम करने वाले खान चंद के बेटे रिंकू सिं की सफलता का सफर आसान नहीं है। आर्थिक तंगी से लड़ते हुए सफलता की कहानी लिखी है। 2009 में जब बल्ला थामा तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पिता करते थे रिंकू सिंह की पिटाई, भाइयों ने की मदद
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिंकू सिंह बताते हैं कि मेरे पिताजी मुझे क्रिकेट खेलता हुआ नहीं देखना चाहते थे। वह नहीं चाहते थे मैं अपना समय क्रिकेट पर बर्बाद करूं। कभी-कभी जिद्द में मेरी पिटाई भी हो जाती थी। खेलकर जब मैं घर लौटता था तो पिताजी छड़ी लेकर तैनात रहते थे। हालांकि, मेरे भाइयों ने मेरा साथ दिया और मुझे क्रिकेट खेलने के लिए कहता था। मेरे पास तब गेंद खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। कुछ लोगों ने इसमें भी मेरी मदद की।

कोचिंग सेंटर में पोछा लगाने की नौकरी मिली, ठीक से नहीं हुई थी पढ़ाई
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिंकू बताते हैं- मुझे एक कोचिंग सेंटर में पोछा लगाने की नौकरी मिली। कोचिंग सेंटर वालों ने कहा कि सुबह-सुबह आकर पोछा लगाकर जाया करो। मेरे भाई ने ही मुझे यह नौकरी दिलाई थी। मैं ये नौकरी नहीं कर पाया और नौकरी छोड़ दी। मैं पढ़ भी नहीं पा रहा था, तो लगा कि अब क्रिकेट पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए। मैंने सोच लिया कि क्रिकेट ही मुझे अब आगे ले जा सकता है और मेरे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।

डूबते करियर को मिला सहारा, 2009 में 11 वर्ष की उम्र में थाम लिया बल्ला
2012 में ऐसी विषम परिस्थिति भी आई जब डूबते करियर को तिल बराबर सहारा मिला और इस बल्लेबाज ने मेहनत से सी सफलता रच दी। वर्ष 1998 में जन्मे रिंकू के घर में आर्थिक तंगी थी। इन हालातों में वह अधिक पढ़ नहीं पाए। मगर, क्रिकेट में रुचि ने भविष्य का रास्ता दिखा गया। 2009 में 11 वर्ष की उम्र में क्रिकेट का ककहरा सीखने को बल्ला थामा।

करियर खत्म होने का था खतरा, मुस्‍लिम दोस्त ने की मदद
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिंकू ने बताया था कि 2012 में उप्र अंडर-16 ट्रायल के लिए नाम चयनित होने के बाद कुछ लोगों ने उनका चयन संबंधित फार्म गायब करने की साजिश रची थी, लेकिन उस वक्त उनके करीबी मित्र जीशान ने उनका साथ दिया था। जीशान का परिचय कानपुर में चयनकर्ता सुरेश शर्मा से था। उन्होंने चयनकर्ता को इस प्रकरण से अवगत कराते हुए रिंकू को खिलाने की सिफारिश की और चयनकर्ता ने मुख्य चयनकर्ता शशिकांत खांडेकर से विचार-विमर्श कर दोबारा ट्रायल कराया और उन्होंने 154 रन की पारी खेलकर चयनकर्ताओं का दिल जीत लिया।

रिंकू को इन तीन लोगों का मार्गदर्शन मिला, फरिश्ते बनकर आए ये लोग लोग
रिंकू ने बताया कि मसूद अमीन और मोहम्मद जीशान ने मेरी काफी मदद की। उनका मार्गदर्शन मेरे लिए अहम रहा। इसके अलावा शाहरुख खान ने मेरी काफी मदद की। 2017 में रिंकू को पंजाब किंग्स ने पहली बार खरीदा था। तब वह 10 लाख रुपये में बिके थे। हालांकि, यह शाहरुख की कोलकाता नाइट राइडर्स टीम थी, जिसने 2018 में रिंकू को बड़ा स्टेज दिया। उन्हें केकेआर फ्रेंचाइजी ने तब 80 लाख रुपये में खरीदा था।

अलीगढ़ का पहला क्रिकेटर, जिसने खेला आईपीएल
रिंकू बताते हैं- अलीगढ़ से निकलकर आईपीएल खेलने वाला मैं पहला खिलाड़ी बना। इसमें खेलने से इतने पैसे मिले कि घर परिवार में किसी ने उतने पैसे नहीं देखे थे। घर की सारी दिक्कतें दूर हो गईं। जमीन लेकर घर बनवाया और जो कर्जे थे वो चुका दिए।

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