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ये है ऐसी दरगाह, जहां हर साल लगती है ‘श्रद्धा’ की बोली

कहते हैं कि अलीगढ़ के अतरौली क्षेत्र के खेड़ा गांव स्थित मियां की दरगाह पर श्रद्धालुअों की हर मुराद पूरी हो जाती है । लेकिन श्रद्धालुओं की इसी श्रद्धा की दरगाह कमेटी हर साल बोली लगाती है ।

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Sudhanshu Trivedi

Jun 24, 2016

atrouli dargah

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अलीगढ़.
जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर अतरौली क्षेत्र के गांव खेड़ा स्थित मियां की दरगाह पर इन दिनों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है । लोगों का मानना है कि यहां मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की इसी श्रद्धा की दरगाह की कमेटी हर साल बोली लगाती है । जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है दरगाह कमेटी उसे ही श्रद्धालुओं से बसूली की खुली छूट दे देती है और फिर यहां कदम-कदम पर लगती है 'श्रद्धा' की बोली ।


दरगाह पर बच्चों का गैंग

लोगों की श्रद्धा का फायदा कुछ लोग अपने मुनाफे के लिये करने से नहीं चूक रहे हैं । यहां आने वाले लोगों की पहली पसंद बनी दरगाह के आसपास भयावह गंदगी फैली हुई है, जिसकी बदबू से यहां सांस लेना भी दुश्वार है । भीख मांगते बच्चों के गैंग को देखकर लगता है कि ये अन्य जिलों से आये हुए हैं, जिन्हें पता है कि यहां आने वाला शख्स कुछ न कुछ देकर जरूर जायेगा।


दुकानदारों की लूट खसोट

यहां आसपास खुली दुकानें, जिनपर दरगाह पर चढ़ाने के लिये चादर व फूल मिलते हैं । दुकानदार 101 रूपये से लेकर 1000 रूपये तक में श्रद्धालुओं बेचते हैं । चादर के नाम फटा चीथड़ा, दो टूटी अगरबत्तियां, एक पुराना नारियल व एक टूटा हुआ मिट्टी का दीया देते हैं। इससे भी अच्छा चाहिए तो अंदर से लाकर देने की व्यवस्था है, जिसे खोलकर देखने पर वह बदबूदार और फटा हुआ मिलेगा। प्रसाद भी दस-दस रूपये के पैकेट में यहां मिलता है। दरगाह के अंदर घुसते ही एक व्यक्ति झाड़ा लगाने के नाम पर श्रद्धालुओं से सौ-सौ रूपये वसूलता है।


चादर चढाने का दाम 500 रुपये

यहां श्रद्धालुओं को दरगाह पर चादर चढ़ाने के लिये चादर के साथ पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं । रुपये न देने पर श्रद्धालुओं का अपमान करते हुए दरगाह कर्मी चादर वापस कर देते हैं। पैसे न देने पर श्रद्धालु चादर वहीं रखकर चले जाते हैं और जो पैसे देते हैं उनकी चादर वहां मौजूद लोग खुशी-खुशी चढ़ा देते हैं।


मुंडन को 150 रूपये की पर्ची

दरगाह पर बच्चों के मुंडन करने की परंपरा है लेकिन मुंडन करने के लिए बच्चे के नाम से 150 रूपये की पर्ची कटती है। और मुंडन के बाद नाई के 100 रूपये भी पक्के हैं । दरगाह के बाद खड़े खाने-पीने की चीजें बेचने वालों का राज भी यहां कायम है । खाद्य पदार्थ बेचने वाले मुकेश, नरेंद्र और ललित ने बताया कि यहां दरगाह के पास खड़े होने के लिये 300 रूपये प्रत्येक दिन के हिसाब से पर्ची कटवानी पड़ती है और न देने पर दरगाह के ठेकेदारों द्वारा सामान छीन लिया जाता है।


धर्म की आड़ में अवैध वसूली

पहासू से अपनी पत्नी मनोरमा के साथ आये दिनेश नाम के एक श्रद्धालु ने बताया कि कई वर्ष पहले मैं अपने पिता के साथ आया था, इस बार मेरी शादी के बाद जब बच्चा हुआ तो मैं कई वर्षों बाद अपने पिता दौजीराम व माता रामवती के साथ दुबारा आया हूं। दिनेश की मां रामवती ने कहा कि पहले जब यहां आये थे तो कोई पैसों का खेल नहीं था, लेकिन अब धर्म की आड़ में यहां अवैध वसूली हो रही है।


मन्नत पूरी करने के नाम पर एक हजार की बसूली

19 वर्ष बाद यहां आये दूसरे श्रद्धालु अमरपाल ने बताया कि मैं अपनी पत्नी अनीता, बड़े भाई मुकेश व उनकी पत्नी लक्ष्मी के साथ यहां आया हूं। मन्नत पूरी करने के नाम पर हमसे एक-एक हजार रूपये जबरदस्ती ले लिये गये। यहां जबरन रूपये मांगे जाते हैं और न देने पर अपशब्द बोलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाती। दिल्ली से आये संजय ने बताया कि एक रूपये में बिकने वाली माचिस यहां दो रूपये में मिलती है। मुझसे यहां बलि के नाम पर तीन हजार रूपये लिये गये हैं।


एसडीएम करेंगे जांच

दरगाह पर "श्रद्धा" की बोली और श्रद्धालूओ से हो रही बसूली के मामले के बारे में पत्रिका ने जब अतरौली के उपजिलाधिकारी अमित कुमार को बताया तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है लेकिन आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है । वह शुक्रवार को स्वयं मामले को देखेंगे ।

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