
अगर आपको ये बात मालूम हो जाए तो AMU को कभी नुकसान नहीं पहुचाएंगे
अलीगढ़। अगर आपको यह मालूम हो जाए कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University ) को कितनी मेहनत और कुरबानी से बनाया गया है तो आप सपनों में भी इसको नुकसान पहुँचाने की कोशिश नहीं करेंगे। इसका एक बड़ा कारण यह है कि छात्र - छात्राओं को यह मालूम ही नहीं कि हमारे बुजुर्गों ने इस इदारे को कायम करने में कितनी मेहनत की है।
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यह उद्गार विधि विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. शकील समदानी (Shakeel samdani) ने पॉलिटिकल साइंस फोरम, राजनीतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित सर ‘‘सैयद अहमद खान, एमएओ कॉलेज एवं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’’ (Sir Syed Ahmed MAO College and Aligarh Muslim University) विषय पर व्याख्यान देते हुए कहीं। व्याख्यान का आय़ोजन गांधी जयंतीपर किया गया। प्रो. समदानी ने कहा कि सर सैयद ने कॉलेज बनाने से पहले इंग्लैंड जाकर स्वयं अंग्रेजी शिक्षा पद्धति, रहन-सहन, सामाजिक तानेबाने और उनकी खूबियों का अध्ययन किया और देश में लौटकर कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड के पैटर्न पर एमएओ कॉलेज की स्थापना की।
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अमुवि के इतिहास पर प्रकाश डाला
चेयरपर्सन प्रो. निगार जुबैरी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज का व्याख्यान विभाग के छात्रों को अमुवि के इतिहास और सर सैयद की जीवनी पर प्रकाश डालने के लिए किया गया है। प्रो. मुहिबुल हक ने मेहमानों का धन्यवाद किया तथा डा. परवेज आलम ने प्रोग्राम का संचालन किया। इस अवसर पर प्रो. एआर बीजापुर, डॉ. खुर्रम, डॉ. राहत हसन, डॉ. फिरदौस, डॉ. आदिल, प्रो. अरशी खान और डॉ. मुसाइब आदि भी उपस्थित थे।
Published on:
02 Oct 2019 07:09 pm

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