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भगोरिया का रंग चढ़ा : मांदल की थाप पर झूम उठा आदिवासी अंचल

सात दिवसीय उत्सव : धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा और खरगोन जिले में सज गए मेले

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आदिवासियों की मस्ती के पर्व भगोरिया के सात दिवसीय उत्सव का आगाज मंगलवार से हो गया है। झाबुआ, आलीराजपुर, धार, खरगोन, बड़वानी और खंडवा जिले के आदिवासी अंचल में कई स्थानों पर भगोरिया मेला लगा। इसमें युवाओं की टोलियां पारंपरिक वेशभूषा के साथ आधुनिक परिधानों में भी नजर आई। चांदी के गहनों से सजी युवतियों ने बांसुरी की धुन पर जमकर कुर्राटियां भरीं। लोगों ने ढोल-मांदल बजाकर पारंपरिक नृत्य कर मेले का लुत्फ उठाया।

होली तक अंचल का हर हाट-बाजार भगोरिया के रूप में सजेगा

झाबुआ के कई स्थानों पर युवकों के हाथ में बांसुरी की जगह मोबाइल ओर परम्परागत परिधान से अलग जीन्स टीशर्ट व रंग बिरंगे जूते और चश्मे पहने भी नजर आए, तो वहीं कुछ युवतियां भी परम्परागत परिधान छोड़ आधुनिक साडिय़ों में नजर आई। आलीराजपुर में ठेठ लोक संस्कृति के साथ ही गुजराती परंपराओं की झलक भी देखने को मिली।पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी जोड़े अपने पारंपरिक प्रेम पर्व भगोरिया की विश्व प्रसिद्ध मस्ती में डूब रहे है। सदियों से मनाए जा रहे भगोरिया के जरिए आदिवासी युवा बेहद अनूठे ढंग से अपने जीवनसाथी चुनते आ रहे हैं।