
Allahabad high cour
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक आदेश में कहा है कि मांस रखने या ले जाने से गोमांस या गोमांस उत्पादों की बिक्री या आवागमन करने को गोवध अधिनियम के तहत दंडनीय नहीं माना जा सकता, जब तक कि इस बात का पुख्ता या पर्याप्त सबूत न दिखाया जा सके कि बरामद पदार्थ गोमांस ही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने पीलीभीत के पुरानपुर इलाके के इब्रान उर्फ शेरू की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि बरामद पदार्थ गोमांस ही है। याची की ओर से कहा गया कि वह पेंटर है और जब छापा मारा गया था, तो वह घर में पेंटिंग का काम कर रहा था, उस पर लगे आरोप के लिए कोई अन्य सबूत नहीं है।
पीलीभीत में दर्ज कराई गई थी प्राथमिकी
उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसका गोमांस या उसके उत्पादों या उसके परिवहन से कोई लेना देना नहीं है। सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि बरामद मांस गोवंश से जुड़ा है और वह याची के घर से बरामद हुआ है, इसलिए वह जमानत पाने का अधिकारी नहीं है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितयों को देखते हुए याची को शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। याची के खिलाफ पीलीभीत के पुरानपुर थाने में गोवध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
Updated on:
02 Jun 2023 08:11 am
Published on:
02 Jun 2023 08:10 am

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