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बाहुबली अतीक अहमद को फिर लगा बड़ा झटका, दो मुकदमे में जमानत निरस्त

प्रयागराज जिले के एमपी एमएलए कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश डॉक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल जमानत निरस्त अर्जी पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य व अतीक के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क पेश किए। दोनों तरफ की दलील सुनने के बाद न्यायालय दोनों मामले में मिले जमानत को निरस्त कर दिया।

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बाहुबली अतीक अहमद को फिर लगा बड़ा झटका, दो मुकदमे में जमानत निरस्त

बाहुबली अतीक अहमद को फिर लगा बड़ा झटका, दो मुकदमे में जमानत निरस्त

प्रयागराज: बाहुबली अतीक अहमद की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हूं। एक तरफ जहां दोनों बेटों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ बाहुबली पिता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। शहर पश्चिमी के बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह का अपहरण और हत्या मामले में अतीक अहमद की जमानत निरस्त कर दी गई है। बाहुबली को इन दोनों मुकदमे में अतीक को जमानत मिली थी। प्रयागराज जिले के एमपी एमएलए कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश डॉक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल जमानत निरस्त अर्जी पर सुनवाई की।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य व अतीक के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क पेश किए। दोनों तरफ की दलील सुनने के बाद न्यायालय दोनों मामले में मिले जमानत को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि जमानत मिलने के बाद बाहुबली आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने की वजह से निर्णय लिया गया है।

जमानत की गई निरस्त

मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय ने कहा कि अपराध समाज के लिए हानिकारक कृत्य है। जमानत पर रिहा करने का यह आशय नहीं कि वह रिहा होने के बाद फिर अपराध करे। आरोपित को जमानत मिली, लेकिन वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा। पुलिस की आख्या के अनुसार 75 आपराधिक मुकदमे हैं। परिस्थितियों, अपराध की गंभीरता को देखते हुए एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के प्रकाश में स्वीकृत जमानत निरस्त किए जाने योग्य है।

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गवाहों को धमकाने का आरोप

बाहुबली अतीक अहमद पर आरोप है कि वर्ष 2006 में विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह महेंद्र पटेल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसे अगवा कर लिया गया और हत्याकांड में गवाही से मुकर जाने के लिए दबाव बनाया गया। इसके अलावा 20 जनवरी 2003 को धूमनगंज थाने पर हाजी मोहम्मद इस्लाम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके रिश्तेदार अशरफ की हत्या कर दी गई। इस मामले में भी अतीक अहमद को बाद में जमानत मिल गई थी लेकिन इन पर आरोप है कि उन्होंने गवाहों को धमकाया। सभी मामले को संज्ञान पर लेने के बाद न्यायालय ने सरकार की तरफ से मिली अर्जी पर सुनवाई करते हुए जमानत निरस्त कर दिया।