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“पालकी से उतरता तो अधिकारी मेरी जान…” शंकराचार्य ने दिया चौंकाने वाला बयान

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रशासन पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।

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Shankaracharya Avimukteshwarananda on Pahalgam attack

Shankaracharya Avimukteshwarananda on Pahalgam attack

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रशासन पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। शंकराचार्य का कहना है कि कुछ अधिकारी उनका “काम तमाम” करने की तैयारी में थे।

"पालकी से नीचे उतारने की कोशिश की गई"

उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन जब वह संगम स्नान के लिए पालकी में जा रहे थे, तभी बार-बार उन्हें पालकी से नीचे उतारने की कोशिश की गई। उनके सेवकों को पुलिस ने जबरन पकड़कर घसीटते हुए ले जाया गया। इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालात बिगड़ने के बाद शंकराचार्य बिना स्नान किए ही लौट गए थे।

घटना के बाद से शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर बैठे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वह धरने पर नहीं हैं, बल्कि प्रशासन उन्हें जहां छोड़कर गया था, वहीं विराजमान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने साधु-संतों के साथ मारपीट की। शंकराचार्य ने पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, गृह सचिव मोहित गुप्ता और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को इस पूरे मामले का जिम्मेदार बताया। उन्होंने एक सीओ विनीत सिंह पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने संगम नोज पर हिरासत में लिए गए साधु-संतों को पीटा, जिससे कई लोग घायल हो गए।

35 लोगों को हिरासत में लिया गया

शंकराचार्य का दावा है कि इस घटना में 35 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 12 लोगों का मेडिकल कराया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बुजुर्गों और कम उम्र के साधु-संतों तक को नहीं छोड़ा गया। उन्होंने यह भी कहा कि अमावस्या रात एक बजे तक थी और प्रशासन को बातचीत का मौका दिया गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया।

हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी

उन्होंने साफ कहा कि पालकी से स्नान करना उनकी परंपरा है और जब तक प्रशासन लिखित रूप से माफी नहीं मांगता, वह वहां से नहीं उठेंगे। जरूरत पड़ी तो अगले साल भी इसी तरह विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री खुद भी आ सकते हैं। शंकराचार्य ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि माघ मेले में चारों शंकराचार्यों के लिए अलग से प्रोटोकॉल बनाया जाना चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ पालकी से संगम स्नान कर सकें।

"साधु-संतों के साथ मारपीट के आरोप गलत"

वहीं, शंकराचार्य के आरोपों पर मेला प्रशासन ने सफाई दी है। कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि किसी को भी संगम स्नान से नहीं रोका गया। भीड़ अधिक होने के कारण शंकराचार्य से कुछ देर रुकने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने किसी के साथ बदसलूकी नहीं की।डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेला अधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना गया है। वहीं पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट के आरोप गलत हैं और अगर जांच में कुछ सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी।