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Ganga Dussehra 2021: गंगा की अविरलता बनाए रखने के लिए संगम तट पर ‘गंगा समग्र’ की बैठक

आरएसएस के अनुषांगिक संगठन 'गंगा समग्र' की बैठक में देशभर से 50 गंगापुत्र बैठक में ले रहे हैं हिस्सा। बड़ा अभियान चलाएगा संघ। राष्ट्रीय जलनीति पर भी हो रही है चर्चा, घर-घर पेयजल पर भी बात।

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ganga samagra meeting

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज. गंगा दशहरा के मौके पर प्रयागराज में संगम तट पर गंगापुत्रों का जुटान हुआ है। वहां दो दिनों तक गंगा की अविरलता और और निर्मलता बनाए रखने पर मंथन चलेगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठन गंगा समग्र की राष्ट्रीय बैठक 20 जून को प्रयागराज के झूंसी स्थित गंगा धाम में होगी। बैठक में जहां एक तरफ इस बात की समीक्षा और मंथन किया जाएगा कि बीते एक साल में क्या काम हुए तो वहीं आने वाले साल के लिये कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। राष्ट्रीय जलनीति पर भी चर्चा हो रही है और घर-घर पेयजल भी बैठक के विषय में शामिल है। उसके एक दिन पहले 19 जून को यहां गंगा समग्र न्यास बोर्ड की बैठक हो रही है। दो दिनों तक चलने वाले आयोजन में गंगा समग्र के केन्द्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों के अलावा संयोजक व सह संयोजक आदि लगभग 50 पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं।


बैठक में नदियों पर बात के साथ ही जल संरक्षण भी विस्तृत चर्चा हो रही है। इस बात पर गौर किया जा रहा है कि नदियों की सफाई और उन्हें स्वच्छ रखने के लिये अब तक क्या किया गया और आगे किया किया जाएगा, यह भी तय होगा। राष्ट्रीय जल नीति पर मंथन के साथ ही जल संरक्षण, तालाबों व कुओं का निर्माण और उन्हें बचाने की कार्ययोजना बनायी जा रही है। 20 जून को होने वाली बैठक में आरएसएस के सह सर कार्यवाहक व आयाम प्रमुख कृष्णगोपाल के अलावा संगठन सचिव मिथिलेश और मार्गदर्शक मंडल के रामाशीष भी शामिल होंगे।


गंगा की अविरलता को बनाए रखने में आरएसएस का अनुषांगिक संगठन गंगा समग्र भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। संगठन का बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त इलाकों में केन्द्र सरकार की गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने जैसी योजना फोकस रहता है। इसके अलावा यह गंगा के किनारे प्रदूषण कम करने और हरियाली बढ़ाने के प्रयासों में भी जुटा रहता है।


इस बार की बैठक में मुख्य फोकस गंगा समेत नदियों में गिर रहा एसटीपी का पानी, इसे रोकने के उपाय, नदियों का प्रवाह सुनिश्चित करना, नदी किनारे के गांवों में हरियाली बढ़ाने का प्रयास और पाॅलीथीन आदि के प्रयोग को कम करवाने के प्रयास जैसे विषणों पर केन्द्रित है। इसके अलावा गंगा जीवियों का जीवन स्तर जैसे विषयाों पर कार्ययोजना भी बनाई जाएगी। गंगा किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की समीक्षा होगी।

बीते दिनों कोरोना काल में गंगा में प्रदूषण की चिंता, इसके बाद वाराणसी में एसटीपी के पानी के चलते गंगा में शैवाल से पानी का हरा हो जाना जैसे विषय गंगा प्रेमियों के लिये चिंता का विषय रहे। गंगा समग्र की बैठक में भी इन मुद्दों पर जरूर चिंतन होने की उम्मीद है।

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