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यूपी के इस बाहुबली नेता के खिलाफ दर्ज हैं तीन सौ मुकदमे, सत्रह साल की उम्र में दर्ज हुआ था पहला मामला

-पांच बार विधायक और सांसद चुना गया -यूपी सहित अन्य राज्यों में कायम है रुतबा

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प्रयागराज। जरायम की दुनिया में बाहुबली के नाम से पहचान रखने वाले अतीक अहमद के दहशत के साम्राज्य पर सीबीआई का शिकंजा कस लिया है। उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों की फेहरिस्त में शामिल अतीक अहमद का दबदबा उनके शहर से लेकर आसपास के जिले और दूसरे प्रदेशों तक कायम है ।अतीक अहमद पर 300 से ज्यादा मुकदमे दर्ज है।जिनमें 33 मुकदमें चल रहे हैं।17 साल की उम्र में पहली बार हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद अतीक पर मुकदमें का सिलसिला जारी रहा

यूपी सहित बिहार में भी दर्ज हुए मुकदमें
जरायम की दुनिया से सियासत के गलियारे तक अतीक अहमद ने जो चाहा वो किया राजनीतिक दल बदले विधायक से लेकर देश की सबसे वीआईपी सीट से सांसद चुने गए। जब भी जेल गए तो सलाखों के पीछे से ही अपना साम्राज्य संभाले रखा। मायावती की सरकार में मुकदमें का सिलसिला पांच साल तक लगातार चलता रहा। इसके बावजूद भी अतीक अहमद की हनक कम नहीं हुई।17 साल की उम्र में अतीक पर 1979 में हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआए 1992 तक अतीक पर लखनऊ ,कौशांबी, चित्रकूट, इलाहाबाद सहित बिहार में अपहरण वसूली के 44 मामले दर्ज हुए। 1986 से 2000 तक सिर्फ इलाहाबाद में उनके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले की ओर गैंगस्टर एक्ट में दर्ज किए गए थे।

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पांच बार रहे विधायक
जरायम की दुनिया में तेजी से नाम कमा रहे अतीक ने सियासत में आने का मन बनाया और 1989 में पहली बार इलाहाबाद शहर पश्चिमी से विधायक बने अतीक अहमद पहले 1991,1993 का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी की तरह लड़ा और विधायक बने 1996 में इसी सीट पर अतीक अहमद को समाजवादी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया। फिर विधायक चुने गए अतीक अहमद को बेनी प्रसाद वर्मा, मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद प्राप्त रहा।अतीक को जब भी मदद की जरूरत पड़ी मुलायम सिंह का पूरा कुनबा उनके साथ खड़ा नजर आया।

अपनी सियासत की बुलंदियों पर थे
अतीक अहमद अपनी सियासत की बुलंदियों पर थे।पांच बार विधायक रहने के बाद अतीक अहमद पर मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद मिला और अतीक अहमद को 2004 में फूलपुर लोकसभा से समाजवादी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया और अतीक ने जीत दर्ज करके संसद में अपनी जगह बनाई। अतीक के सांसद बनने के बाद शहर दक्षिणी की खाली हुई सीट पर बसपा ने राजू पाल को अपना उम्मीदवार बनाया और इसी सीट पर अतीक अहमद अपने भाई अशरफ को स्थापित करने में लगे हुए थे। उपचुनाव हुआ और इस सीट पर राजूपाल ने बड़ी जीत दर्ज की इसके कुछ ही दिन बाद 25 दिसंबर 2005 को राजू पाल की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई।जिस मामले में अतीक और अशरफ दोनों लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ इस मामले में भी सीबीआई जांच चल रही है। 2007 में सूबे में सत्ता बदली मायावती सूबे की मुखिया बनी और अतीक सहित उनके करीबियों पर मुकदमें का सिलसिला शुरू हुआ।

अखिलेश -शिवपाल के विवाद में सामने आएं अतीक
2017 में सूबे में सियासी उठापटक के बीच अतीक अहमद समाजवादी पार्टी के पारिवारिक कलह के बीच एक बार फिर सामने आए । अखिलेश यादव ने अतीक अहमद से दूरी बनाते हुए उन्हें पार्टी के टिकट से बेदखल किया।उसके बाद अतीक अहमद ने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (सुआट्स )में घुसकर वहां के कर्मचारियों से मारपीट के मामले में आरोपित बने । इस मामले में अतीक अहमद पर मुकदमा दर्ज हुआ और अतीक अहमद को जेल जाना पड़ा। नैनी जेल से अतीक को बाहर भेजा गया।

देवरिया जेल में अपहरण ने तहलका मचा दिया
देवरिया जेल में पहुंचे अतीक ने लखनऊ के बिजनेसमैन जिसे अतीक अहमद अपना बिजनेस पार्टनर बताते रहे हैं।उसको जेल में बुलाकर पीटने का मामला सामने आया इस मामले में उनके बिजनेस पार्टनर मोहित जायसवाल ने आरोप लगाया कि उनके साथ जबरदस्ती की गई उनका अपहरण करके उन्हें देवरिया जेल ले जाया गया जहां पर अतीक अहमद के लोगों ने मोहित अग्रवाल की कंपनी को जबरन अपने नाम करवा लिया। इस मामले में मोहित जायसवाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद यूपी से बाहर अहमदाबाद की जेल में भेजा गया और बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई बाहुबली की चौखट पर पहुंची और 12 घंटे तक उनकी पत्नी और बच्चों से पूछताछ करती रही।

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