
प्रयागराज हाईकोर्ट
वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से ट्रांसपोर्टनगर बसाया जाना है। जिसके लिए 25 जून 2001 को नोटिस जारी कर काश्तकारों से आपत्तियां मांगी गईं थी।प्राधिकरण ने परगना कसवर के चार गांवों कर्नाडाडी, विरवा, मिल्की चक, सराय मोहन में करीब 86.299 हेक्टेयर भूमि तय की थी। वाराणसी डीएम ने 27 अप्रैल 2011 को काश्तकारों के साथ बैठक कर 45.249 हेक्टेयर भूमि का अवार्ड घोषित कर 39 करोड़, 26 लाख, 76 हजार, 250 रुपये मुआवजा दिया और शेष बची हुई भूमि पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। इसमें कुल चार सौ काश्तकारों ने मुआवजे की राशि दी गई।
इसके साथ ही कोर्ट ने करार नियमावली के तहत अवार्ड घोषित होने के बाद जिन काश्तकारों को मुआवजा मिल चुका है। उन काश्तकारों की याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने वाराणसी के ठाकुर प्रसाद व अन्य और हरिवंश पांडेय व अन्य की याचिका पर एक साथ फैसला सुनाते हुए दिया है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि घोषित अवार्ड बहुत ही कम है। प्राधिकरण मामूली दर पर काश्तकारों की भूमि लेकर उसे कई गुना अधिक दामों पर बेचकर मुनाफा कमा रहा है। इसके अलावा मुआवजा पाने वालों की जो सूची कोर्ट में प्रस्तुत की गई। उसमें एक ही काश्तकारों के नाम कई बार हैं। साथ परिवार के अन्य सदस्यों के भी नाम जोड़े गए हैं। कुछ काश्तकारों को पूरी राशि भी नहीं मिली है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन काश्तकारों को अवार्ड घोषित होने के बाद मुआवजा नहीं मिल सका है या फिर जो अपेक्षित मुआवजा नहीं प्राप्त कर सके हैं। वे विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करेंगे। विशेष भूमि अधिकारी दो सप्ताह के भीतर उनके दावों का निस्तारण कर मुआवजा राशि उनके खाते में भेज देंगे।
Updated on:
04 Jun 2023 07:44 am
Published on:
04 Jun 2023 07:19 am
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
