अलवर. राजकीय प्राथमिक विद्यालय पैंतपुर जिले मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर है । विद्यालय में पांचवी कक्षा तक के नौनिहाल पढ़ने आते है। 49 नौनिहालों एक ही अध्यापक के भरोसे है। विद्यालय में एक अध्यापक है जो विद्यालय में नौनिहाल को पढ़ाए या गांव के बीएलओ का कार्य संभाले। अध्यापक को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में तीन कक्ष है , लेकिन अध्यापकों की कमी के कारण एक ही कक्ष में विद्यालय का कार्यालय और नौनिहालों को पढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार एक ओर विद्यालयों के विकास पर ध्यान दे रही है और दूसरी ओर इस विद्यालय में एक ही अध्यापक है। विद्यालय में असुविधा होने के कारण गांव से लगभग 18 से 20 नौनिहाल पढ़ने के लिए आ रहे है। विद्यालय में एक अध्यापक होने के कारण विद्यालय की गतिविधियों को सूचना मुख्य कार्यालय तक नही पहुंच पाती है।
विद्यालय में है कई बड़ी समस्याए
पैंतरपुर विद्यालय में बंदरों का बहुत अधिक आंतक है । अध्यापक नौनिहालों को एक मिनट भी अकेला नही छोड सकता है। बंदर विद्यालय भवन में एक बर्गद को पेड होने के कारण उसमें पूरे दिन वहीं रहते है। विद्यालय में बंदरों से नौनिहालों को खतरा है। इस विद्यालय में आने वाले आधे से ज्यादा बच्चे नटों के है जो अपने माता-पिता के साथ बाहर हरियाणा, उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश , चंदीगढ़ व बाहारी राज्यों में चले जाते है तथा एक से दो माह के लिए गांव मे आते है तो विद्यायम में नौनिहालों की संख्या बढ़ जाती है।साथ ही विद्यालय गांव से एक किलोमीटर दूर है तो आने वाले नौनिहालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पैंतपुर विद्यालय एक अध्यापक के भरोसे पर चल रहा है। इसमें सरकार की ओर से दो अध्यापक लगाने चाहिए ताकि नौनिहालों की अच्छी तरह से पढ़ाई हो सके। इससे गांव के बीएलओ का कार्य भी समय पर हो सके।