
साल की शुरुआत एक सख्त चेतावनी बनकर सामने आई है। महज तीन महीनों में 92 पोस्टमार्टम के आंकड़े बताते हैं कि यहां जिंदगी दो मोर्चों पर हार रही है, सड़क पर और हालातों के आगे। हर तीसरे मामले में या तो तेज रफ्तार जिम्मेदार है या टूटता हौसला। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच 92 पोस्टमार्टम हुए। इनमें 27 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई, जबकि 26 मामले आत्महत्या के हैं। दोनों ही कारण कुल मामलों के लगभग बराबर हैं, जो हालात की गंभीरता को साफ दर्शाते हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार विषाक्त पदार्थ का सेवन कर जान देने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इन तीन महीनों में 9 महिलाओं व 7 पुरूषों ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। जबकि फंदा लगाकर आत्महत्या करने वालों में पुरूषों की संख्या अधिक है। इस अवधि में 7 पुरूष और 2 महिलाओं ने फंदा लगाकर आत्महत्या की। वहीं, एक व्यक्ति ने ट्रेन के आगे छलांग लगाकर मौत का रास्ता चुना।
ग्रामीण क्षेत्रों में आत्महत्या के केस ज्यादा
इस साल तिमाही में आत्महत्या करने वालों में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की संख्या ज्यादा है। इसमें भी विषाक्त पदार्थ का सेवन कर जान देने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक है। जबकि फंदा लगाकर आत्महत्या करने वालों में पुरूष ज्यादा हैं। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें और आत्महत्या के दोनों कुल पोस्टमार्टम का एक तिहाई हैं।
इन थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटना में मौतें ज्यादा
इन तीन माह में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें बगड़ तिराहा थाना क्षेत्र में हुई। इसके अलावा वैशाली नगर और अरावली विहार थाना क्षेत्र सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में हॉट स्पॉट बना हुआ है। खास बात यह भी है कि पिछले साल भी इन थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें हुई थी। ऐसे में इन क्षेत्रों सड़क दुघर्टनाओं में कमी लाने के लिए प्रयास करने होंगे। वहीं, शिवाजी पार्क से हसन खां मेवात की तरफ जाने वाले मुख्य रोड पर डिवाइडर बनने से इन तीन माह में कई जिंदगियां बर्बाद होने से बच गई। इससे पहले यहां सड़क दुर्घटनाओं में कई जाने गई थी।
Updated on:
29 Apr 2026 11:01 am
Published on:
29 Apr 2026 11:00 am
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