जो मरीज पॉजीटिव आते हैं, उनको टीबी अस्पताल में उसके घर के आसपास के सेंटर के लिए रैफर कर देते हैं। वहां से मरीज दवा लेता रहता है। जबकि टीबी अस्पताल में कुल 45 कर्मचारियों का स्टाफ है। इनमें से 15 कर्मचारी जिला मुख्यालय पर लगे हुए हैं। जबकि अन्य जिलेभर अन्य जगहों पर लगे हुए हैं। इनका मरीजों को कोई फायदा नहीं मिलता है। जबकि कर्मचारी हर माह लाखों रुपए वेतन लेते हैं। लेकिन काम के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।