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अलवर का पानी पीने से गल जाती हैं हड्डिया

अलवर जिले के 207 गांवों का पानी पीने योग्य ही नहीं है। इन गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है।

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डिजीटल क्रांति, मेक इन इंडिया जैसी बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार के लिए लोगों को शुद्ध जल मुहैया कराना मुश्किल हो रहा है। अलवर जिले के 207 गांवों का पानी पीने योग्य ही नहीं है। इन गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है।

अप्रेल माह में हुई जलदाय विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है। फ्लोराइड का पानी लगातार पीने से शरीर में कई तरह की हड्डी व दांतों सम्बंधी बीमारी होने का खतरा रहता है।

पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। इससे अधिक मात्रा शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि जिले में 207 गांवों के लोग जिस पानी को पी रहे हैं, उसमें फ्लोराइड की मात्रा तय मानक से दो गुनी है।

कुछ क्षेत्रों में तो फ्लोराइड 3 से 4 मि.ग्रा. प्रति लीटर मिली है। एेसे में जलदाय विभाग व सरकार की तरफ से अब तक कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। हालात में सुधार नहीं हुए तो, जिले के कई हिस्सों में हड्डी व दांत सम्बंधी बीमारी के मरीजों की संख्या बढऩे लगेगी।

अस्थियां कमजोर हो जाती हैं

अस्थी रोग विशेषज्ञ डा. महेश वशिष्ठ का कहना है कि तय मानक से ज्यादा फ्लोराइड वाला पानी पीने से अस्थियां कमजोर हो जाती हैं और बार-बार छोटी सी चोट से ही हड्डी टूटने की समस्या बढ़ जाती है।

अस्थियों में विकृती के कारण हाथ-पैर मुड़ जाते हैं और वे किसी काम के नहीं रहते। घुटनों और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ जाती है और दांत गल जाते हैं। बच्चों के शरीर का विकास नहीं हो पाता। उनकी लंबाई नहीं बढ़ पाती। इससे फ्लोरोसिस का खतरा रहता है।

उमरैण में लगाए जाएंगे आरओ

जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता शिवसिंह का कहना है जिन जगहों पर फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है। उन एरिया में आरओ प्लांट लगाये जाएंगे। जिले में आरओ प्लांट लगाने का काम चल रहा है। लोगों की परेशानी हो देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

जिले के हालात

जिले के बहरोड़ में 6, कठूमर में 66, किशनगढ़बास में 5, कोटकासिम में 13, लक्ष्मणगढ़ में 35, मुण्डावर में 3, नीमराणा में 8, रामगढ़ में 30 तथा रैणी मे 30 गांव फ्लोराइड युक्त हैं।

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