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गुटखे की राजधानी बना अलवर, रोज 50 लाख का गुटखा गटक जाते हैं लोग

डेढ़ लाख लोग प्रतिदिन करते हैं गुटखे का सेवन, गुटखा जनित बीमारियों से पीडि़तों की संख्या में हो रहा इजाफा

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अलवर

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Prem Pathak

Jun 17, 2018

Alwar : gutkha factory

गुटखे की राजधानी बना अलवर, रोज 50 लाख का गुटखा गटक जाते हैं लोग

अलवर जिला गुटखे की राजधानी का रूप ले चुका है। यहां हर रोज करीब डेढ़ लाख युवा, महिलाएं व अन्य आयु वर्ग के लोग 45 से 50 लाख रुपए का गुटखा गटक जाते हैं। यही कारण है कि जिले में गुटखा जनित बीमारियों से पीडि़तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। गुटखे का सेवन करने वालों में 38 साल तक के युवाओं की संख्या ज्यादा है। खास बात यह है कि शहर में एक दर्जन स्थानों पर गुटखे का उत्पादन हो रहा है, फिर भी कानून की पहुंच वहां तक नहीं हो पाई है।

पांच साल में जांच के नाम पर खानापूर्ति

अब तक जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। स्वास्थ्य विभाग ने पांच साल में कुल 23 से 25 सैम्पल लिए। इस साल सुपारी का एक सैम्पल लिया गया। जबकि बीते साल सुपारी के दो सैम्पल लिए गए। 2014 में सुपारी के दो सैम्पल में जर्दा मिला था। अलवर में मिलने वाले ज्यादातर गुटखे में नियम के हिसाब से लेबर नहीं होता है। अब तक तीन सुपारी के सैम्पल में तम्बाकू मिल चुका है। जो पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा साल 2012 मीठी सुपारी जांच के दौरान खाने योग्य नहीं मिली, उसमें हानिकारक तत्व मिले थे। लेकिन कार्रवाई एक पर भी नहीं हुई।

गुटखा के सेवन से मुंह के कैंसर की आशंका

गुटखा खाने से मुंह का कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा दांत भी खराब हो सकते हैं। इतना ही नहीं, गुटखे में मौजूद कई किस्म के रसायनों से हमारे डीएनए को भी नुकसान संभव है। गुटखा हमारे सेक्स हार्मोन को भी प्रभावित कर सकता है।

एक साल में मिले मरीज

चिकित्सकों के अनुसार एक साल में अलवर में कैंसर के 69 मरीज मिल चुके हैं। इसमें मुंह के कैंसर के 27 मरीज शामिल हैं। इनको इलाज के लिए उच्च सेंटर के लिए रैफर किया गया है। अलवर में एक साल पहले एनसीडी सैल शुरू हुई थी। इसके अलावा दर्जनों मरीज निजी अस्पताल में भी मिलते हैं।

कुछ ने दिया गुटखे को हर्बल का नाम

कुछ गुटखा उत्पादकों ने अब हर्बल नाम से गुटखे का उत्पादन शुरू किया है। जबकि वह भी एक तरह का गुटखा है। उसमें भी कई तरह के कैमिकल मिलाए जाते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। अब ऐसे निर्माताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

पानी की होती है बर्बादी

गुटखा निर्माता कम्पनी पानी की भी बर्बादी करती है। पाउच को साफ करने व सुपारी को धोने में पानी बर्बाद होता है। गुटखा निर्माता कम्पनियों में लगे टयूबवैल हर दिन हजारों लीटर पानी का दोहन कर रहे हैं, वहीं लोग गर्मी में एक बाल्टी पानी के लिए तरस रहे हैं।