
अवैध खनन को खुली छूट: हर साल 39 करोड़ का राजस्व देने वाला रॉयल्टी ठेके का नहीं कोई धणी धोरी
अलवर. राज्य सरकार को हर साल करीब 39 करोड़ का राजस्व देने वाला राजगढ़ तहसील का रॉयल्टी ठेके का इन दिनों कोई धणी धोरी नहीं है। गत महीने रॉयल्टी का ठेका खत्म होने के बाद अब तक नए ठेके की व्यवस्था नहीं की जा सकी, इस कारण राजगढ़ तहसील के टहला क्षेत्र में इन दिनों मार्बल का बड़े पैमाने पर अवैध खनन व अवैध निर्गमन हो रहा है। इससे पर्यावरण के साथ ही सरकार को हर माह लाखों रुपए रॉयल्टी का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
अवैध खनन व नियम विरूद्ध निर्गमन पर अंकुश लगाने तथा सरकार को खनन सामग्री की रॉयल्टी के रूप में राजस्व प्राप्ति के लिए खनन विभाग की ओर से खनन क्षेत्रों में हर साल या दो साल के लिए रॉयल्टी ठेके छोड़ने का प्रावधान है। इसी के तहत राजगढ़ तहसील में 26 अप्रेल 2021 से 31 मार्च 2023 तक रॉयल्टी ठेका प्रति वर्ष के लिए करीब 39 करोड़ रुपए का छोड़ा गया था। ठेके की अवधि पूरी होने से पहले ही ठेकेदार की ओर से ठेका छोड़ दिया। खान विभाग की ओर से यहां नए ठेका अभी नहीं किया है। हालांकि थानागाजी क्षेत्र में भी रॉयल्टी का ठेका करीब एक साल से नहीं छोड़ा गया है।
ठेका नहीं होने से सरकार को लाखों का नुकसान
राजगढ तहसील के टहला क्षेत्र में मार्बल की करीब 150 खाने हैं, इनमें से वर्तमान में करीब 10 मार्बल खान ही चालू हैं। जबकि राजगढ़ व अलवर के मिनरल उद्योगों में टहला व थानागाजी के झिरी, मल्लाना एवं आसपास के क्षेत्रों से मार्बल खंडा की सप्लाई हो रही है। इन उद्योगों में प्रतिदिन कई हजार टन मार्बल खंडों की मांग है। यह पूर्ति राजगढ़ व थानागाजी तहसील क्षेत्रों में मार्बल के अवैध खनन से हो पा रही है। राजगढ़ तहसील क्षेत्र के श्रीचंदपुरा रॉयल्टी नाके पर ठेका नहीं होने से यहां अवैध खनन जोरों पर है। ठेका नहीं होने से इस अवैध खनन सामग्री की रॉयल्टी सरकार को नहीं मिल पा रही है, जिससे हर महीने 10 लाख रुपए से ज्यादा राजस्व का नुकसान हो रहा है।
लीज होल्डर ही ऑनलाइन जमा करा रहे रॉयल्टी
राजगढ़ तहसील में रॉयल्टी ठेका नहीं होने पर खनन विभाग ने लीज होल्डर को खनन सामग्री की ऑनलाइन रॉयल्टी जमा कराने की छूट दी है। लेकिन यह छूट सरकार को भारी पड़ रही है। कारण है कि राजगढ़ तहसील क्षेत्र में वैध लीज होल्डर करीब 10 हैं, जबकि अवैध खनन इससे कई गुना ज्यादा क्षेत्र में हो रहा है। लीज होल्डर भी रवन्ने के आधार पर मार्बल की प्रति टन 165 रुपए की दर से रॉयल्टी ऑनलाइन जमा करा रहे हैं, जबकि ओवरलोड व बिना रवन्ने के अवैध खनन मार्बल की रॉयल्टी जमा ही नहीं हो रही। इतना ही पूरे क्षेत्र में खान विभाग की ओर से अवैध खनन व ओवरलोड अवैध खनन सामग्री की जांच की व्यवस्था ही नहीं है।
जांच की जिम्मेदारी किसकी
क्षेत्र में अवैध खनन, ओवरलोड खनन सामग्री की जांच की जिम्मेदारी खान विभाग के सम्बिन्धत फोरमैन यानि फील्ड इंस्पेक्टर की होती है। राजगढ़ व थानागाजी क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी सम्बिन्धत फोरमैन की है, लेकिन यहां जांच की व्यवस्था नहीं के बराबर है।
Published on:
03 Apr 2022 11:49 pm
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