खनिज विभाग ने जिले के मार्बल जोन टहला क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए मार्बल की बंद पड़ी खानों के रास्तों में खाई खुदवाई है। टहला क्षेत्र के मल्लाना, कारवाड, टहला क्षेत्र में मार्बल की करीब 15 बंद खानों के रास्तों काे जेसीबी से खुदाई कर बंद कराया गया है।
अलवर. खनिज विभाग ने जिले के मार्बल जोन टहला क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए मार्बल की बंद पड़ी खानों के रास्तों में खाई खुदवाई है। टहला क्षेत्र के मल्लाना, कारवाड, टहला क्षेत्र में मार्बल की करीब 15 बंद खानों के रास्तों काे जेसीबी से खुदाई कर बंद कराया गया है।उल्लेखनीय है कि गत 27 जून को राजस्थान पत्रिका के अलवर संस्करण में यह कैसा अभियान...कागजों में खानें बंद और उद्योगों को मार्बल खंडों की कमी नहीं शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। पत्रिका ने समाचार में बताया था कि टहला क्षेत्र में मार्बल की बंद पड़ी करीब 15 खानों में अवैध खनन खुलेआम हो रहा है। वहीं प्रशासन की ओर से चलाए गए संयुक्त अभियान के बाद भी अकेले टहला मार्बल जोन में रिकॉर्ड में बंद खानों में बड़ी मात्रा में मार्बल के दोहन की जानकारी दी गई थी।
अरावली नोटिफिकेशन, एनजीटी, न्यायालय एवं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेशों के तहत टहला क्षेत्र की ज्यादातर मार्बल खानें वर्तमान में बंद है। इन खानों में मार्बल खंडे का उत्पादन नहीं होने से रिकाॅर्ड में टहला क्षेत्र में मार्बल का उत्पादन नगण्य है।
पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के अगले दिन 28 व 29 जून काे खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची और टहला, कारवाड, मल्लाना में बंद 15 से अधिक खानों के रास्तों काे जेसीबी से खुदवाकर अवरूद्ध कर दिया, जिससे अवैध खनन होने पर भी मार्बल खंडों का वाहनों में अवैध परिवहन नहीं हो सके।
इसलिए होता है अवैध खनन
जिले में मिनरल्स इकाइयों में 400 से ज्यादा मशीनों में मार्बल खंडों की पिसाई होती हैं। ये मशीनें राजगढ़, एमआइए एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्र में लगी हैं। वर्तमान में टहला क्षेत्र में 5- 6 मार्बल की खानें चालू िस्थति में हैं, इन 5- 6 खानों से करीब 400 से ज्यादा मशीनों के लिए मार्बल खंडों की पूर्ति संभव नहीं है। इस कारण यहां बड़े पैमाने पर बंद पड़ी खानों में अवैध खनन हो रहा था।
टहला क्षेत्र की बंद खानों के रास्ते अवरूद्ध किए
टहला क्षेत्र में मार्बल की बंद खानों में अवैध खनन रोकने के लिए रास्तों में खाई खुदवाई गई है। दो दिन टहला क्षेत्र में खाई खुदवाने का कार्य किया गया है।
राजेन्द्र चौधरीखनि अभियंता, अलवर