
जगन्नाथ विवाह महोत्सव मेले का आगाज, मेला स्थल पर इन हालातों से होगा सामना
पत्रिका न्यू•ा नेटवर्क
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अलवर. भगवान जगन्नाथ की आगामी 21 जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा के लिए अभी मार्ग पूरी तरह तैयार नहीं हो सका, वहीं रूपवास स्थित मेला स्थल पर भी व्यवस्थाएं माकूल नहीं दिखाई दी। रथयात्रा पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से रवाना होकर रूपबास स्थित मेला स्थल पर पहुंचेगी। यहां पांच दिन तक मेले का आयोजन किया जाएगा। मेला आयोजन में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन मेला स्थल पर तैयारियां अभी आधी अधूरी ही दिखाई पड़ती हैं। ऐसे में मेले के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
भगवान जगन्नाथ मेले के लिए फिलहाल भवानी तोप से मेला स्थल मार्ग में इंटर लॉकिंग का कार्य अभी जारी है। इसके चलते मार्ग पर वन वे ट्रैफिक व्यवस्था है। सड़क के बीच बने डिवाइडर भी खराब हालत में हैं, डिवाइडर मिट्टी से भरे हुए हैं ।
मेला स्थल पर रूपहरि मंदिर के नीचे बरसात में कीचड़ नहीं हो, इसलिए इस स्थान को पक्का किया गया है। शेष जगह पर पानी को रोकने के लिए मलबा डाला गया है। यहां स्थित सरकारी स्कूल के बाहर भी मिटटी डाल दी गई है। इससे यहां आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। मेले में प्रतिवर्ष उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के दुकानदार दुकानें लगाने के लिए आते हैं। इसी के साथ ही देश भर से श्रद्धालु भी यहां दर्शनों के लिए आते हैं। मेला नजदीक होने के कारण यहां पर दुकानों का लगना शुरू हो गया है। मेले के लिए दुकानदारों के पहुंचने के बाद भी यहां अब तक न तो यहां पीने के लिए पानी का इंतजाम हो पाया है और न ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शौचालय आदि की व्यवस्था हो पाई है।
रथयात्रा मार्ग अभी पूरी तरह तैयार नहीं
प्रशासन की ओर से जगन्नाथ रथयात्रा के मार्ग में पेचवर्क का कार्य तो शुरू कराया गया है, लेकिन पूरा रथयात्रा मार्ग अभी ऐतिहासिक रथयात्रा लायक तैयार नहीं हो पाया है। ज्यादा परेशानी नंगली चौराहे, एसएमडी चौराहे, मोती डूंगरी मार्ग पर है। यहां अब तक सड़कों पर पेचवर्क नहीं हो सका है। ऐसे में रथयात्रा में परेशानी हो सकती है।
गंदगी के ढेर भी बिगाड़ रहे शोभा
मेला स्थल पर दुकानों के आसपास आवारा पशुओं के जमावड़े के कारण जगह- जगह पर गोबर के ढेऱ लगे हुए हैं। जिन्हें अभी तक नहीं हटाया गया है। इसकी वजह से दुकानदार व श्रद्धालुओं को दुर्गन्ध में रहना पड़ रहा है। मेले में खजले की दुकान लगाने वाले रमनलाल ने बताया कि बारिश के आते ही सारा गोबर फैल जाता है। इससे हादसे की भी आशंका रहती है। वहीं अन्य दुकानदारों ने बताया कि पिछले सालों तक यहां पर बोरिंग व हैंडपंपों से काम चल जाता था लेकिन अब वे भी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में मजबूरी में दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
Published on:
18 Jul 2018 10:02 am
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