अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना के अलवर बफर रेंज िस्थत बाला किला क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व तक जहां बाघों का बसेरा था, वहां अब 22 मार्च से नवरात्र पर लक्खी मेला भरेगा।
अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना के अलवर बफर रेंज िस्थत बाला किला क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व तक जहां बाघों का बसेरा था, वहां अब 22 मार्च से नवरात्र पर लक्खी मेला भरेगा। हालांकि प्रशासन एवं सरिस्का प्रशासन की ओर से करणीमाता मेले को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं, लेकिन बाला किला क्षेत्र में बाघों व शावकों के विचरण के चलते इस बार प्रशासन ही नहीं, बल्कि मेले में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को भी सतर्कता बरतनी होगी।
अलवर बफर रेंज के बाला किला जंगल में पिछले कई दिनों से बाघ-बाघिन एवं दो शावकों का मूवमेंट देखा गया है। शावकों की प्रतापबंध वन चौकी के आसपास के क्षेत्र में लगातार दो- तीन दिन साइटिंग भी हुई है। वनकर्मियों के अनुसार बाघ- बाघिन एवं शावकों का मूवमेंट अभी बाला किला क्षेत्र के आसपास के जंगल में है।
बाला किला जंगल सरिस्का से अलग
वैसे तो सरिस्का टाइगर रिजर्व में ऐतिहासिक पाण्डुपोल हनुमान मंदिर है और यहां हर साल लक्खी मेला भरता है। सरिस्का में 20 से ज्यादा बाघ होने के बाद भी मेले के दौरान कभी अप्रिय घटना नहीं हुई, इसका कारण सरिस्का का जंगल खुला होना है। खूब जगह होने के कारण मेले के दौरान बाघ दूर तक जाने को स्वतंत्र हैं, लेकिन अलवर बफर रेंज का जंगल सरिस्का से कुछ अलग तरह का है। यहां पहाड़ी क्षेत्र होने से बाघाें के लिए खुली जगह कम है। जिससे मेले की भीड़ होने पर बाघो को घूमने के लिए ज्यादा जगह नहीं बचती। इसी कारण लोगों को मेले के दौरान सतर्कता बरतने की ज्यादा जरूरत है।
प्रशासन ने रोड ब्रेकर व चेतावनी बोर्ड लगवाए
बाला किला जंगल क्षेत्र में बाघ- बाघिन एवं शावकों का विचरण होने के कारण प्रशासन ने प्रतापबंध चौकी से जाने वाले रोड पर पिछले दिनों रोड ब्रेकर का निर्माण कराया है और लोगों को बाघों से सावचेत करने के लिए चेतावनी बोर्ड भी लगवाए हैं। प्रकृति मित्र संघ के प्रबंध निदेशक लोकेश खंडेलवाल सहित अन्य वन्यजीव प्रेमियों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर बाघों के विचरण को देखते हुए बाला किला क्षेत्र में रोड ब्रेकर बनाने एवं चेतावनी बोर्ड लगवाने की मांग की थी।