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चुनावी साल में घोषणाएं अपार, काम शुरू नहीं हुआ तो हो जाएंगी बेकार

अलवर. चुनावी साल में राज्य सरकार की ओर से जिले के लिए अनेक घोषणाएं की, लेकिन छह माह में इन्हें अमलीजामा नहीं पहनााय तो खटाई में भी पड़ सकती है। कारण है कि आगामी अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगनी है, ऐसे में घोषणाओं को मूर्तरूप देने के लिए सरकार के पास महज छह महीने का ही समय बचा है।

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अलवर

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Prem Pathak

Mar 27, 2023

चुनावी साल में घोषणाएं अपार, काम शुरू नहीं हुआ तो हो जाएंगी बेकार

चुनावी साल में घोषणाएं अपार, काम शुरू नहीं हुआ तो हो जाएंगी बेकार

अलवर. चुनावी साल में राज्य सरकार की ओर से जिले के लिए अनेक घोषणाएं की, लेकिन छह माह में इन्हें अमलीजामा नहीं पहनााय तो खटाई में भी पड़ सकती है। कारण है कि आगामी अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगनी है, ऐसे में घोषणाओं को मूर्तरूप देने के लिए सरकार के पास महज छह महीने का ही समय बचा है।राज्य सरकार की ओर से इस साल बजट सत्र में हसनखां मेवात नगर के पार आरओबी सहित अनेक सड़क निर्माण व अन्य विकास कार्यों की सौगात दी है। वहीं पिछले बजट की अलवर को स्मार्ट सिटी बनाने एवं कम्पनी बाग में डबल बेसमेंट पार्किंग निर्माण सहित अनेक घोषणाओं का अभी मूर्तरूप लेना शेष है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर वित्त विभाग का अडंगा

राज्य सरकार की ओर से पिछले साल अलवर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा को एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर अभी कुछ नहीं आ पाया है। पिछले दिनों विधानसभा में अलवर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने को लेकर शहर विधायक संजय शर्मा की ओर से पूछे गए सवाल में जवाब आया कि सरकार अलवर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की मंशा रखती है, लेकिन यह प्रस्ताव अभी वित्त विभाग के पास विचाराधीन है। यह िस्थति तो तब है, जब यूआइटी अलवर स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार कर करीब छह महीने पहले ही सरकार को भेज चुकी है। लेकिन अब तक न तो यूआईटी के प्रस्ताव को मंजूरी मिली और न ही बजट का आवंटन हुआ।

टेंडर से निर्माण शुरू होने को चाहिए छह माह

किसी भी प्रोजेक्ट को मूर्तरूप देने के लिए प्रस्ताव तैयार करने से निर्माण होने में कम से कम छह महीने का समय लगता है। कंसलटेंसी से प्रस्ताव तैयार कराने, टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करने और कार्यादेश के बाद निर्माण कार्य शुरू होने में छह महीने से ज्यादा समय की जरूरत होती है, लेकिन प्रदेश में यह साल चुनावी है, इस कारण सरकार की ओर से घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने में जल्दी नहीं की गई तो ज्यादातर के अटकने की आशंका है।

पिछली पूरी नहीं हुई, नई घोषणाओं पर संदेह

अलवर जिले को लेकर पिछले सालों में सरकार की ओर से की गई कई घोषणाएं अभी धरातल पर नहीं आ सकी हैं, इस कारण नई घोषणाओं के विधानसभा चुनाव से पहले अमलीजामा पहन पाने में संदेह है।