अलवर जिला प्रदेश में तेजी से उभरती अर्थ व्यवस्था है। कारोबार के मामले में अलवर जयपुर जिले के बाद पूरे राजस्थान में दूसरे स्थान पर है। यहां हर साल 100 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। यही कारण है कि अलवर जिला हजारों लोगों को रोजगार देता है। आइए जानते हैं कि क्या है अलवर की अर्थ व्यवस्था का आधार।
अलवर. प्रदेश में अलवर जिले की अर्थ व्यवस्था कई अन्य जिलों से आगे है। इसका आधार जिले में बढ़ते उद्योग एवं कारोबार। प्रदेश में अकेला अलवर जिला हर साल आठ हजार करोड़ की जीएसटी देता है। यानी औसतन 10 प्रतिशत उत्पाद पर वसूली जा रही है तो अलवर जिले में हर साल 80 से 100 हजार करोड़ का व्यापार होता है। कारोबार की यही गति अलवर की उन्नति और रोजगार का आधार है।
अलवर जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर में शामिल है और भिवाड़ी औद्योगिक शहर अलवर जिले की आर्थिक रीढ़ है। अकेला अलवर जिला महीने में 700 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी राजस्व देता है। यानी अलवर जिले में हर महीने 7 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। इसमें बड़ा हिस्सा उद्योग से मिलने वाले कारोबार का है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से मिलता है बड़ा कारोबार
अलवर जिला ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रदेश में विख्यात रहा है। भिवाड़ी, अलवर एवं अन्य शहरों में ऑटोमोबाइल यूनिट का संचालन बेहतर तरीके से हो रहा है। इसी का परिणाम है कि अलवर जिले की अर्थ व्यवस्था मजबूत है। वहीं अन्य उद्योगों से भी बड़ी मात्रा में उत्पादों का कारोबार होता है।
रोजगार का आधार है किसी जिले का कारोबार
किसी भी जिले में रोजगार की िस्थति का अंदाजा उसके कारोबार से आसानी से लगाया जा सकता है। जिन जिलों में उद्योग एवं व्यापार फल फूल रहा है, वहां रोजगार के संसाधन अन्य जिलों से ज्यादा होना स्वभाविक है। अलवर जिला औद्योगिक एवं व्यापारिक दृष्टि से प्रदेश में अन्य जिलों से काफी आगे है। इसमें भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र का बड़ा रोल है। यही कारण है कि अलवर जिला स्थानीय युवाओं के साथ ही राजस्थान के अन्य जिलों के साथ ही दिल्ली, हरियाणा एवं अन्य प्रदेशों के लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम है।
अलवर जिला सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण
बढ़ती अर्थ व्यवस्था के चलते अलवर जिला रोजगार एवं उन्नति के साथ ही बड़ी मात्रा में राजस्व देने के कारण भी महत्वपूर्ण है। अलवर संभाग हर महीने करीब 80 करोड़ की आइजीएसटी, 30 करोड़ की सीजीएसटी, 42 करोड़ से ज्यादा की एसजीएसटी, साढ़े चार करोड़ का सेस यानी 150 से 175 करोड़ करोड़ का जीएसटी राजस्व देता है। इसी प्रकार भिवाड़ी संभाग हर महीने करीब 340 करोड़ की आइजीएसटी, 73 करोड़ की सीजीएसटी, 106 करोड़ से ज्यादा की एसजीएसटी, 32 करोड़ से ज्यादा का सेस यानी 550 करोड़ का जीएसटी राजस्व देता है।