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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा की क्या है परेशानी

विधानसभा में प्रमुख राजनीतिक दलों को बगावत का डर सता रहा है, इस कारण वे अभी से डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। भाजपा की पहली सूची में बगावती सुर उठे थे, जिसने चुनाव रणनीतिकार की मुसीबत बढ़ा दी है। भाजपा में तो बगावती सुर दिखाई दिए, लेकिन कांग्रेस की सूची आने पर भी वहां भी ऐसा ही नजारा दिख सकता है।

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अलवर

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Prem Pathak

Oct 15, 2023

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा की क्या है परेशानी

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा की क्या है परेशानी

अलवर. प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों के लिए प्रत्याशी चयन ही बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि उसके बाद टिकट के दावेदारों के बगावती सुर परेशानी का बड़ा कारण है। यही कारण है कि भाजपा हो या कांग्रेस प्रत्याशी चयन में फूंक- फूंक कर कदम बढ़ा रही है। प्रत्याशियों की सूची जारी में हो रही देरी के पीछे भी प्रमुख कारण यही है।
भाजपा एवं कांग्रेस की दिल्ली में मुख्य चुनाव समिति की बैठकों के बाद दोनों ही दलों की प्रत्याशियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। हालांकि भाजपा अलवर जिले में तीन विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की घोषणा कर भी चुकी है और दूसरी सूची का टिकट के दावेदारों को बेसब्री से इंतजार है। कांग्रेस अलवर जिले में एक भी सीट पर अभी प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है।

इसलिए प्रमुख दलों की चिंता ज्यादा

कांग्रेस व भाजपा सहित अन्य प्रमुख दलों की चिंता इसलिए ज्यादा है कि दोनों ही दलों में टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। कांग्रेस में अलवर जिले की 11 सीटों के लिए 250 से ज्यादा टिकट के दोवदार हैं। वहीं भाजपा में यह संख्या 300 के पार है।

भाजपा की पहली सूची में टिकट के दावेदारों की संख्या ज्यादा होने के नतीजे बगावती सुर के रूप में सामने भी आ चुके हैं। यही कारण है कि भाजपा पहली सूची घोषित करने के बाद थोड़ी ठिठकी सी दिखाई पड़ रही है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि पहली सूची को देख उठे बगावती सुर शांत होने तक दूसरी सूची के लिए इंतजार किया जाए। हालांकि भाजपा में पहली सूची को लेकर उठे बगावती सुर काफी हद तक शांत हुए हैं। इस कारण अब दूसरी सूची जल्द आने की चर्चा होने लगी है। वहीं कांग्रेस के रणनीतिकारों की चिंता भी कुछ ऐसी ही है। यहां भी टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। प्रत्याशियों की सूची जारी होने पर कांग्रेस में भी कुछ स्थानों पर बगावती सुर उठने की संभावना है कि कांग्रेस के रणनीतिकार भी प्रत्याशी चयन में काफी सावधानी बरत रहे हैं।

अभी जिताऊ की चिंता, फिर बगावत थामने की

विधानसभा चुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों की चिंता कम नहीं है। इन रणनीतिकारों की पहली चिंता जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है। प्रत्याशी तय करन के बाद इन नेताओं की चिंता टिकट के अन्य दावेदारों की बगावत रोकने की है। यही कारण है कि नामांकन प्रक्रिया से पहले कांग्रेस व भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित करना चाहती है। जिससे दावेदारों की बगावत शांत करने को समय मिल सके। हालांकि भाजपा व कांग्रेस के रणनीतिकारों ने बगावती सुरों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए योजना बनाना शुरू कर दिया है।