इसमें प्रथम कक्ष में राजा-महाराजाओं के वस्त्र, हाथी दांत, लकडी, हाथीदांत, चंदन व मिटटी के बर्तन, राजा के शिकार किए गए जीव, वाद्य यंत्र, खुदाई में निकली प्रतिमाएं, चांदी की मेज, साइकिल, वाद्य यंत्र आदि को दर्शाया है। दूसरे कक्ष में राग-रागिनी पर आधारित चित्र दिखाए गए हैं। इसमें किशनगढ़ शैली, बूंदी, अलवर, राजपूत व मुगलकालीन शैली के चित्र हैं। इसके साथ ही हस्तलिखित दुर्लभ ग्रंथ रखे गए हैं, जिसमें अकबरनामा, बाबरनामा, शाहनामा आदि शामिल हैं। तीसरे कक्ष में अस्त्र-शस्त्र का संग्रह है, जिसमें एक म्यान में दो तलवार, मोहम्मद गौरी का जिरह बख्तर चांदी की मेज, महाराजा जयसिंह की साइकिल आदि शामिल है।
संग्रहालय में प्रतिवर्ष पांच हजार से ज्यादा पर्यटक आते हैं। इस साल मार्च में 8053 व अप्रेल 6753 पर्यटक संग्रहालय की सैर कर चुके हैं। पिछले साल अप्रेल – 5114 मई – 4843 जून – 6482 जुलाई – 6836 अगस्त – 5880 सितंबर- 5288 अक्टूबर- 7790 नवंबर – 5716 दिसंबर 5943 पर्यटकों ने संग्रहालय देखा।
अलवर संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री
अस्त्र शस्त्र – 800, पेंटिंग 250, प्रतिमाएं 15 , हस्तलिखित ग्रंथ व पुस्तक -30, मिटटी, हाथी दांत की सामग्री सहित विविध वस्तुएं – 500