
अलवर के सरसों तेल की कई राज्यों में मांग, श्रमिकों के आने का इंतजार
अलवर. लॉक डाउन के बावजूद अलवर जिले के सरसों तेल की कई राज्यों में मांग बढ़ी है। कृषि उपज मंडियों के खुलने से तेल मिलों को आसानी से सरसों मिलने लगी है। अब तेल मिलों को लॉक डाउन में अपने घर गए श्रमिकों के वापस लौटने का इंतजार है।
पिछले दिनों लॉक डाउन के दौरान सरसों नहीं मिलने के कारण सरसों तेल का भाव महंगा हो गया था। इस समय काफी संख्या में श्रमिक अपने राज्यों में चले गए जो लौट कर नहीं आ सके हैं। इसी प्रकार अलवर जिले के श्रमिक खेतों में महंगी मजदूरी पर काम कर रहे हैं। इन सभी का प्रभाव अलवर के तेल उद्योग पर पड़ रहा है।
सरसों व तेल दोनों हुए सस्ते
पिछले दो दिनों में सरसों तेल के भाव थोक कच्ची घानी 88 से 91 रुपए प्रति किले पर आ गया है जो 99 रुपए तक पहुंच गया था। अलवर के तेल के आसाम व बंगाल के साथ स्थानीय तेल मिल में भी है। स्थानीय बड़े तेल उद्योगों में अडानी, पतंजलि व धारा मुख्य हैं। जिले में प्रतिदिन 55 से 60 हजार सरसों की बोरियों की सभी तेल मिलों में मांग है जो अभी पूरी नहीं हो पा रही है।
खैरथल तेल उद्योग पर छाए काले बादलों का हटना शुरू
खैरथल. तेल जगत में ख्याति प्राप्त कस्बा खैरथल में कोरोना वायरस के चलते ठप पड़ी तेल मिले चलने लगी हंै। स्थानीय मिल प्रबंधकों का कहना है कि लॉक डाउन के चलते सभी मंडियों बंद होने से तेल मिलों में सरसों का स्टॉक समाप्त हो चला था। सरसों का अब कोई संकट नहीं है। खैरथल रीको स्थित अन्य तेल मिल मालिक अनमोल गुप्ता व सुरेंद्र सिंघानिया ने बताया कि मंडियों में माल आने से सरसों की समस्या समाप्त हो गई है। गत वर्ष की अपेक्षा सरसों के भाव भी ज्यादा हैं वहीं तेल भी तेज ही है।
यह कहते हैं तेल उद्योग से जुड़े लोग
अलवर जिले में 3.25 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ है। तेल मिलों में अब बाहर गए श्रमिकों के आने का इंतजार है जिससे यह उद्योग अपनी पुरानी गति पर आ जाएगा। 20 अप्रेल के बाद श्रमिकों के आने पर रियायत मिलेगी।
-बाबू लाल डाटा, अध्यक्ष, मस्टड ऑयल प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया।
अलवर के सरसों तेल की बहुत मांग है। इस समय सरसों आसानी से मिलने लगी है। आगामी दिनों में श्रमिकों के आने से उत्पादन आसानी से चलने लगेगा।
- अजय आनंद गोयल, तेल उद्योगपति।
Published on:
19 Apr 2020 12:15 am
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