अलवर. शहर में अपराध तेजी से बढ़ रहा है और पुलिस अपराध रोक पाने में नाकाम बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य वजह है कि शहर की अधिकांश पुलिस चौकियां मृतप्राय हो चुकी हैं। ये चौकियां नाम की रह गई हैं और सिर्फ कागजों में चल रही हैं। चौकियों में स्टाफ तो नियुक्त है, लेकिन ये स्टाफ थानों में ही ड्यूटी दे रहा है।अलवर शहर में अखैपुरा, पुराना कटला, लाल दरवाजा, केडलगंज, तीजकी, सामान्य अस्पताल और कालीमोरी पुलिस की मुख्य चौकियां हैं। कभी इन चौकियों में पुलिस स्टाफ 24 घंटे मौजूद रहता था और आसपास क्षेत्र में गश्त-नाकेबंदी से लेकर कानून व्यवस्था का जिम्मा इन चौकियों पर रहता था। चौकियों पर पुलिस की उपिस्थति रहने से अपराधियों में भी डर बना रहता था, लेकिन आज सामान्य अस्पताल और कालीमोरी को छोड़कर इन सभी पुलिस चौकियों की हालत खराब है। ये सभी चौकियां पुलिस रेकॉर्ड में तो जीवित हैं, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है।
बंद रहती हैं ये चौकियां अखैपुरा, पुराना कटला, केडलगंज, लाल दरवाजा, तीजकी पुलिस चौकी शहर कोतवाली थाने के अधीन आती है। पुलिस रेकॉर्ड में इन सभी चौकियों में पांच-छह पुलिसकर्मियों का जाप्ता तैनात है, लेकिन इन चौकियों में स्टाफ मौजूद नहीं रहता है। ये चौकियां बंद पड़ी रहती हैं। इन चौकियों पर तैनात स्टाफ है, लेकिन स्टाफ यहां नहीं रहता। यहां का स्टाफ थानों पर ड्यूटी दे रहा है।
कहीं बोर्ड हटाए तो कहीं रात को सोते हैं पुलिसकर्मी
शहर के पुराना कटला सुभाष चौक पुलिस चौकी काफी पुरानी चौकी है। ये चौकी पिछले काफी समय से बंद पड़ी है। यहां से चौकी का बोर्ड तक हटा दिया गया है। वहीं, तीजकी और केडलगंज चौकी में कुछ पुलिसकर्मी रात को सोने के लिए जाते हैं।
अपराध बढ़े तो चालू की चौकी अरावली विहार थाने के अधीन कालीमोरी चौकी पिछले काफी समय से बंद पड़ी थी। यहां कोई स्टाफ तैनात नहीं रहता था। पिछले करीब डेढ़-दो माह में कालीमोरी और ईटाराणा पुलिया के बीच अपराध बढ़ा। यहां रात के अंधेरे में राहगीरों से लूटपाट की कई वारदातें हुई। इन घटनाओं के बाद पुलिस को चौकी की याद आई और करीब एक सप्ताह पहले पुलिस स्टाफ तैनात कर कालीमोरी चौकी को फिर से चालू कर दिया।
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चौकियों के हालात सुधारेंगे
शहर की सभी पुलिस चौकियों के हालात सुधारे जाएंगे। यहां नफरी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। ताकि आसपास के क्षेत्रों में अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।
– तेजपाल सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अलवर।