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सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास मार्बल के अकूत भंडार

सरिस्का का इको सेंसेटिव जोन अभ्री तक तय नहीं हुआ हुआ है। इससे मार्बल जोन पर फिलहाल ग्रहण लगा है। इको सोंसेटिव जोन तय होने पर सरिस्का के पास मार्बल की 150 से ज्यादा खानें शुरू हो सकती हैं। मार्बल जोन खुलने पर एक हजार से ज्यादा लोगों काे राेजगार मिल सकता है। जानिए सरिस्का पर आखिर कौन लगा रहा ग्रहण।

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सरिस्का के पास मार्बल जोन पर किसने लगाया ग्रहण

सरिस्का के पास मार्बल जोन पर किसने लगाया ग्रहण

अलवर. सरिस्का टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन अभी तय नहीं हो पाने से जिले के मार्बल जोन पर ग्रहण लगा है। वर्तमान में सरिस्का के आसपास 200 से ज्यादा खानें या तो इको सेंसेटिव जोन, सीमा विवाद या पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में बंद है, वहीं नई खान आवंटन का भी रास्ता नहीं खुल पा रहा है। वर्षों बाद भी इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण नहीं होने का सीधा असर जिले के रोजगार एवं अर्थ व्यवस्था पर पड़ा है।


सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास मार्बल के अकूत भंडार है। यह जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वे में स्पष्ट भी हो चुका है। लेकिन इस क्षेत्र में मार्बल का दोहन मात्र 65 खानों में ही हो रहा है। वर्तमान में इसका बड़ा कारण इको सेंसेटिव जोन का सरकार की ओर से निर्धारण नहीं कर पाना है।

टहला क्षेत्र है मार्बल जोन

सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास टहला क्षेत्र पूरा मार्बल जोन माना जाता है। टहला क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में विभिन्न प्रकार के मार्बल के भंडार हैं। यहां झिरी, मल्लाना, कलसी काला ग्वाड़ा, पालपुर, मल्लाना, गोवर्धनपुरा, बलदेवगढ़, तिलवाड़, कालवाड़, टोडा जयसिंहपुरा में मार्बल के भंडार हैं। यदि इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण जल्द हो तो सरिस्का के पास 150 से ज्यादा मार्बल खानें शुरू हो सकता है। इनसे एक हजार से भी ज्यादा लोगों को रोजगार तथा सरकार को 40 से 50 करोड़ का राजस्व हर साल अतिरिक्त मिल सकता है।

समस्या का क्या है कारण

सरिस्का के पास इको सेंसेटिव जोन का क्षेत्रफल 207.77 वर्ग किलोमीटर है। अभी इसका विस्तार सरिस्का के चारों ओर 0 से 1 किलोमीटर तक है। राज्य सरकार की सूचना के अनुसार राजगढ़, टहला क्षेत्र में बाघ रिजर्व का बफर क्षेत्र एक किलोमीटर है और अलवर शहर वन सीमा के निकट शून्य है। वहीं जमवारामगढ़ में यह सीमा शून्य है।इको सेंसेटिव जोन का ड्राफ्ट अभी केन्द्र सरकार के विचाराधीन है। इस ड्राफ्ट में सरिस्का के आसपास क्षेत्र का निर्धारण अलग- अलग है। यही इको सेंसेटिव जोन की समस्या है।

अलवर की पहचान अब मिनरल उद्योग से

भिवाड़ी, नीमराणा, खैरथल औद्योगिक क्षेत्रों के अलवर से अलग होने के बाद अब अलवर जिले की पहचान मिनरल उद्योग से ही संभव है। इसके लिए मार्बल जोन का शुरू होना जरूरी है। कारण है कि अलवर जिले के मार्बल की क्वालिटी अच्छी होने से यह डोलोमाइट पाउडर के लिए बेहतर है। मार्बल जोन खुलने पर मिनरल के 40- 50 उद्योग जल्द ही स्थापित हो सकते हैं। इनमें भी 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता है।

फैक्ट फाइल

मार्बल खान चालू- 65
खानों से रोजगार- 500 लोग

मार्बल खान बंद- 70
इएसजेड से उम्मीद- 150 मार्बल खान शुरू होने की

मार्बल खानों से रोजगार- 1000 लोग
मार्बल खानों से सरकार को लाभ- 50 करोड़ सालाना

जिले में मिनरल खान चालू- 65
शुरू हो सकती है नई मार्बल खानें- 50

नए मिनरल उद्योग से रोजगार- 500 लोगों को