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सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य में एसटी-5 की मौत बना रहस्य, विभाग कर रहा अब यह नया काम

खातेदार फरार, दर्ज होगा चार भाइयों के खिलाफ मामला, मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

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अलवर

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Prem Pathak

Jul 21, 2018

Alwar : Secret of death of ST-5 in Sariska Wildlife Sanctuary

सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य में एसटी-5 की मौत बना रहस्य, विभाग कर रहा अब यह नया काम

अलवर. सरिस्का प्रशासन शिकार की संभावना मान अब कंकालों में बाघिन एसटी-5 को ढूंढ रहा है। गत एक सप्ताह की कार्रवाई के बाद हमीरपुर के जंगल स्थित जयसिंहपुरा गांव के कुओं में बड़ी बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों के मिले दो सिरनुमा कंकालों से बाघिन के शिकार की आशंका और बढ़ गई है। हालांकि कार्रवाई में मिले सिरनुमा कंकाल एवं अन्य वन्यजीवों की हड्डियों की फोरेंसिक जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि ये लंबे समय से गायब चल रही बाघिन एसटी- 5 के हैं या फिर किसी अन्य वन्यजीव के।
सरिस्का प्रशासन ने मुखबिर की पुख्ता सूचना पर गत सप्ताह हमीरपुर जंगल के जयसिंहपुरा गांव में तलाश शुरू की। कार्रवाई के दौरान वनकर्मियों की टीम ने जयसिंहपुरा गांव में बंटाई पर खेती करने वाले खरेंटा गांव निवासी सबेर सिंह को शूकर के शिकार के आरोप में गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान शिकार में संलिप्तता जाहिर होने पर सबेर सिंह के भाई बलदेव ने भी वनकर्मियों के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया था। हालांकि पूछताछ में दोनों ने शूकर का शिकार करने की बात कबूल की थी। रिमांड के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय ने जेल भेज दिया, लेकिन सरिस्का प्रशासन की कार्रवाई जारी रही।

बाघिन एसटी-5 की हत्या से तार जुडऩे की उम्मीद :

जयसिंहपुरा गांव स्थित सूखे कुओं में मिले बड़ी बिल्ली प्रजाति के सिरनुमा कंकाल में एक कंकाल पैंथर या बाघ का होने की संभावना जताई गई है। संभवत: यह कंकाल बाघिन एसटी-5 का हो सकता है। बाघिन गत पांच महीनों से गायब है और सरिस्का प्रशासन सभी जगह और सभी तरीकों से उसकी तलाश कर चुका है। इसके बावजूद वह कहीं भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में सरिस्का प्रशासन भी अब बाघिन एसटी-5 के शिकार की संभावना जता बरामद अवशेषों का जुड़ाव बाघिन के गायब होने से मान रहा है।

कुएं खातेदारी जमीन में होने की संभावना :

जिन कुओं में वन्यजीवों के सिरनुमा कंकाल मिले हैं या हड्डिया और अन्य अवशेष मिले हैं, उनमें एक कुआं संभवत: खातेदारी की जमीन पर है। यह ईश्वर, मुखराम समेत चार भाइयों की बताई गई है। फिलहाल चारों भाई फरार है। वहीं एक अन्य कुआं जंगल में हैं, जिसकी खातेदारी के बारे में पता लगवाया जाएगा। इसके लिए पटवारी से भी रिपोर्ट ली जाएगी। सरिस्का प्रशासन खातेदारों के खिलाफ शिकार का मामला दर्ज कर पूछताछ करेगा। इससे शिकार के बड़े राज खुलने की संभावना है। वहीं जरूरत पडऩे पर जेल में बंद सबेर सिंह व उसके भाई बलदेव को फिर से रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।


खेतों पर लगे थे फंदे या करंट वाले तार :

जयसिंहपुरा स्थित खेतों में भी शिकार के लिए लोहे के तार के फंदे व बिजली करंट के तार लगे थे। संभवत: इन्हीं फंदों व करंट वाले तारों से छूने से नीलगाय, जंगली शूकर व पैंथर, बाघ की मौत की आशंका है। बाद में इन वन्यजीवों को छिपाने के उद्देश्य से कुएं में डालने की आशंका है। गिरफ्तार सबेर सिंह व बलदेव भी पूछताछ में यह बात स्वीकार कर चुके हैं।

सरिस्का प्रशासन को कार्रवाई के दौरान जयसिंहपुरा गांव स्थित सूखे कुओं से बड़ी बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों के सिरनुमा कंकाल मिले हैं। इनमें एक कंकाल पैंथर का हो सकता है। बाघ का कंकाल होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसका पता एफएसएल जांच से लग पाएगा। कार्रवाई अभी जारी है। खातेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
हेमंत सिंह, डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना

दो सूखे कुओं में मिले सिरनुमा कंकाल

सरिस्का की टीम को कार्रवाई के दौरान जयसिंह पुरा गांव स्थित दो कुओं की तलाशी में वन्यजीवों की हड्डियां, दांत, सिरनुमा कंकाल व अन्य अवशेष मिले हैं। इनमें एक कुएं में बड़ी बिल्ली प्रजाति के सिरनुमा कंकाल व अन्य अवशेष मिले हैं। वहीं दूसरे कुएं में वन्यजीवों की हड्डियां, दांत व अन्य अवशेष मिले हैं। बड़ी बिल्ली प्रजाति में पैंथर, बाघ आदि वन्यजीव शामिल हैं। वहीं टीम को कुएं से नीलगाय, जंगली शूकर व अन्य वन्यजीवों के अवशेष भी मिले हैं। सरिस्का प्रशासन का कहना है कि सिरनुमा कंकाल में एक पैंथर या बाघ का हो सकता है, वहीं दूसरा नीलगाय का संभव है। फिलहाल वन्यजीवों के अवशेषों की पशु चिकित्सकों से जांच कराई जाएगी, लेकिन यहां अवशेष किसके हैं, इसका पता चलना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में अवशेषों को देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान की लैब में एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा।

जल्द मंगवाई जाएगी रिपोर्ट

वन्यजीवों के अवशेषों की जांच रिपोर्ट देहरादून से जल्द मंगवान के उपाय किए जाएंगे। इसके लिए सरिस्का सेम्पलों को लेकर किसी अधिकारी को भेजेगा, जो कि हाथों हाथ जांच कराकर रिपोर्ट मिल सके। उम्मीद है कि अवशेष भेजने के तीन-चार दिनों में एफएसएल रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इसके लिए सरिस्का प्रशासन भारतीय वन्यजीव संस्थान से जल्द जांच का अनुरोध भी करेगा।

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